रंगभरी एकादशी कब है, इस दिन बन रहा है चार शुभ संयोग, क्यों है खास

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आमलकी एकादशी, जिसे आंवला एकादशी या रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है यह पावन दिन भगवान विष्णु को समर्पित है, लेकिन इसकी विशेषता यह है कि इस अवसर पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का भी विशेष विधान है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजन करने से सभी प्रकार के पाप, दोष और नकारात्मक प्रभाव समाप्त हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है. कब रखा जाएगा आमलकी एकादशी का व्रत? क्या बन रहे हैं शुभ संयोग? पारण का क्या रहने वाला है शुभ मुहूर्त? जानते हैं

फाल्गुन शुक्ल एकादशी का आरंभ 26 फरवरी की रात 12 बजकर 33 मिनट से होगा और 27 फरवरी रात्रि 10 बजकर 32 मिनट पर इसका समापन होगा. उदया तिथि के अनुसार यह व्रत 27 फरवरी, शुक्रवार को रखा जाएगा. इसी दिन रंगभरी एकादशी का भी उल्लासपूर्ण आयोजन किया जाएगा, जिससे इस पर्व का महत्व और भी बढ़ जाता है.
आमलकी एकादशी से ही काशी में शुरू हो जाती है होली
काशी नगरी में इस दिन का विशेष उत्साह देखने को मिलता है. यहां रंगभरी एकादशी पर शिव और गौरी की आराधना कर उन्हें रंग और गुलाल अर्पित किया जाता है. मान्यता है कि इस दिन शिव-पार्वती का दिव्य मिलन हुआ था, इसलिए भक्त रंगों के माध्यम से अपनी आस्था प्रकट करते हैं. मंदिरों में भजन-कीर्तन, आरती और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है.

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इस दिन बन रहे हैं चार शुभ संयोग
इस साल आमलकी एकादशी का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि इस दिन चार शुभ योगों का संयोग बन रहा है. सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, आयुष्मान योग और सौभाग्य योग. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन योगों में किए गए पूजन, दान और जप-तप का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है. विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा और आंवला वृक्ष की आराधना अत्यंत शुभ मानी जाती है.

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इन महिलाओं को जरूर रखना चाहिए यह व्रत
आमलकी एकादशी का व्रत विशेष रूप से नवविवाहित महिलाओं और उन स्त्रियों के लिए अत्यंत फलदायी बताया गया है जिनका विवाह निश्चित हो चुका है. मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा से करने पर वैवाहिक जीवन सुख, प्रेम और सौभाग्य से परिपूर्ण रहता है. परिवार में शांति और समृद्धि बनी रहती है तथा दांपत्य जीवन में मधुरता आती है.
पारण का शुभ मुहूर्त
व्रत का पारण 28 फरवरी, शनिवार को किया जाएगा. पारण का शुभ समय प्रातः 6 बजकर 47 मिनट से 9 बजकर 6 मिनट तक रहेगा. द्वादशी तिथि का समापन उसी दिन रात्रि 8 बजकर 43 मिनट पर होगा. श्रद्धालु इस निर्धारित समय में विधि पूर्वक व्रत खोलकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे. इस प्रकार आमलकी एकादशी भक्ति, आस्था और शुभ संयोगों से परिपूर्ण एक अत्यंत पावन पर्व है.

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