केरल की राजनीति में बड़ा उलटफेर, विधानसभा चुनाव से पहले ट्वेंटी20 पार्टी ने थामा एनडीए का हाथ, बढ़ेगी विपक्षी खेमों की धड़कन

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तिरुअनंतपुरम. केरल की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। स्थानीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाने वाली ट्वेंटी20 पार्टी ने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए में शामिल होने का ऐलान कर दिया है।  तिरुवनंतपुरम से आई यह खबर न केवल सत्ताधारी माकपा (CPI-M) के नेतृत्व वाले एलडीएफ बल्कि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के लिए भी एक बड़ी चिंता का सबब बन गई है क्योंकि ट्वेंटी20 ने पिछले एक दशक में स्थानीय स्तर पर विकास का जो मॉडल पेश किया है उसने पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को ध्वस्त कर दिया है।   इस फैसले ने न सिर्फ राज्य की सियासी बिसात को नए सिरे से बिछा दिया है, बल्कि लंबे समय से द्विध्रुवीय राजनीति में उलझे केरल में तीसरे विकल्प की भूमिका निभा रही इस पार्टी को राष्ट्रीय राजनीति से जोड़ दिया है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब राज्य में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज़ हो रही हैं और सभी दल नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरण साधने में जुटे हैं।

इस फैसले की घोषणा संयुक्त रूप से भाजपा के केरल प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर और ट्वेंटी20 पार्टी के अध्यक्ष साबू एम जैकब ने की। साबू जैकब केआईटीईएक्स समूह के प्रबंध निदेशक भी हैं और पार्टी की स्थापना के बाद से ही वे इसके चेहरे और रणनीतिकार रहे हैं। घोषणा के साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी तिरुवनंतपुरम दौरे के दौरान साबू जैकब उनके साथ मंच साझा करेंगे। प्रधानमंत्री इस दौरे में भाजपा शासित शहर निगम के लिए प्रस्तावित विकास योजना का अनावरण करेंगे, जिसे स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान भाजपा ने एक बड़े वादे के तौर पर पेश किया था। ट्वेंटी20 के एनडीए में शामिल होने को इसी राजनीतिक और विकासात्मक विमर्श के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।

ट्वेंटी20 पार्टी पहली बार 2015 में राष्ट्रीय सुर्खियों में तब आई थी, जब उसने अपने गृह क्षेत्र किझक्कंबलम ग्राम पंचायत में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। उस समय यह जीत इसलिए भी खास मानी गई क्योंकि केरल में दशकों से कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ और माकपा के नेतृत्व वाला एलडीएफ ही सत्ता की अदला-बदली करते रहे हैं। किझक्कंबलम में ट्वेंटी20 की जीत ने इस धारणा को तोड़ा कि स्थानीय राजनीति में बिना पारंपरिक राजनीतिक विरासत के कोई नई ताकत उभर नहीं सकती। इसके बाद पार्टी ने स्थानीय प्रशासन में विकास, पारदर्शिता और कल्याणकारी योजनाओं को अपनी राजनीति का केंद्र बनाया।

2025 के स्थानीय निकाय चुनावों में ट्वेंटी20 ने एक बार फिर अपनी पकड़ साबित की और किझक्कंबलम पंचायत पर लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की। यह जीत इसलिए भी उल्लेखनीय रही क्योंकि कांग्रेस, माकपा और भाजपा ने कई वार्डों में साझा रणनीति के तहत स्वतंत्र उम्मीदवार उतारे थे, जिनका एकमात्र उद्देश्य ट्वेंटी20 को सत्ता से बाहर करना था। तीनों प्रमुख राजनीतिक धाराओं के इस अप्रत्याशित गठजोड़ के बावजूद ट्वेंटी20 ने न केवल मुकाबला किया, बल्कि स्पष्ट जनादेश हासिल किया। इसे पार्टी ने जनता के भरोसे और अपने प्रशासनिक मॉडल की जीत के रूप में पेश किया।

किझक्कंबलम के अलावा ट्वेंटी20 अब एक और पंचायत पर शासन कर रही है और एक अन्य स्थानीय निकाय में वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। ये सभी स्थानीय निकाय कुन्नथुनाड विधानसभा क्षेत्र में आते हैं, जिसका वर्तमान में प्रतिनिधित्व माकपा के पास है। इस क्षेत्र में ट्वेंटी20 की बढ़ती ताकत ने वाम मोर्चे के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यही रुझान बना रहा तो आगामी विधानसभा चुनाव में यह क्षेत्र त्रिकोणीय मुकाबले का गवाह बन सकता है।

ट्वेंटी20 की राजनीति का आधार उसके द्वारा शासित पंचायतों में लागू की गई विकास और कल्याणकारी योजनाएं रही हैं। पार्टी का दावा है कि उसने स्थानीय प्रशासन में भ्रष्टाचार को लगभग समाप्त कर दिया है और योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंचाया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, स्वच्छता और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में किए गए कार्यों को पार्टी अपने सबसे बड़े राजनीतिक हथियार के रूप में प्रस्तुत करती है। विरोधी दलों की ओर से जहां इसे एक कॉरपोरेट समर्थित मॉडल बताकर आलोचना की जाती रही है, वहीं समर्थकों का कहना है कि यह प्रशासनिक दक्षता और परिणाम आधारित राजनीति का उदाहरण है।

एनडीए में शामिल होने के फैसले को लेकर ट्वेंटी20 नेतृत्व का कहना है कि यह कदम केरल के विकास को राष्ट्रीय दृष्टि से जोड़ने के लिए उठाया गया है। पार्टी का तर्क है कि केंद्र सरकार के साथ तालमेल से राज्य में निवेश, औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। भाजपा के लिए भी यह गठजोड़ अहम माना जा रहा है, क्योंकि केरल में अब तक पार्टी को सीमित चुनावी सफलता ही मिली है। ट्वेंटी20 जैसी स्थानीय रूप से मजबूत और संगठनात्मक रूप से सक्रिय पार्टी के साथ आने से भाजपा को जमीनी स्तर पर अपनी पहुंच बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

हालांकि इस गठबंधन पर सवाल भी उठ रहे हैं। कांग्रेस और माकपा दोनों ने इसे अवसरवादी राजनीति करार दिया है और आरोप लगाया है कि ट्वेंटी20 अपने कारोबारी हितों के लिए वैचारिक समझौता कर रही है। वहीं भाजपा समर्थक इसे केरल में वैकल्पिक राजनीति के विस्तार के रूप में देख रहे हैं। सियासी हलकों में यह भी चर्चा है कि आने वाले दिनों में सीट बंटवारे और साझा कार्यक्रम को लेकर कई दौर की बातचीत होगी, जो इस गठबंधन की दिशा और दशा तय करेगी।

 ट्वेंटी20 का एनडीए में शामिल होना केरल की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। यह कदम न सिर्फ आगामी विधानसभा चुनावों के समीकरण बदल सकता है, बल्कि राज्य में विकास, शासन और वैकल्पिक राजनीति को लेकर चल रही बहस को भी नई धार दे सकता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह नया राजनीतिक गठजोड़ जमीनी स्तर पर कितना असर दिखा पाता है और क्या यह केरल की पारंपरिक राजनीतिक ध्रुवीकरण को सचमुच चुनौती दे पाएगा। केरल की राजनीति जो अब तक केवल दो मोर्चों के बीच बंटी हुई थी अब वहां एक त्रिकोणीय मुकाबले की सुगबुगाहट तेज हो गई है जिसने सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

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