इस वर्ष होली का पर्व ज्योतिषीय और खगोलीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है, क्योंकि रंगों के त्योहार के ठीक एक दिन पहले, 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह ग्रहण न केवल इस साल का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण होगा, बल्कि भारत के कुछ हिस्सों में भी इसका प्रभाव देखा जाएगा, जिसके चलते सूतक काल भी मान्य होगा। होलिका दहन और होली से जुड़े इस खास खगोलीय घटनाक्रम से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारी यहाँ दी गई है:
होली और ग्रहण का संयोग: हिंदू पंचांग के अनुसार, 3 मार्च को दोपहर से शाम तक चंद्र ग्रहण रहेगा, जिसके बाद रात के समय होलिका दहन किया जाएगा। अगले दिन, 4 मार्च को रंगों की होली खेली जाएगी। यह चंद्र ग्रहण पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में लगेगा। चूंकि यह ग्रहण भारत के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी प्रभावी होगा।
चंद्र ग्रहण का समय (भारतीय समयानुसार): यह चंद्र ग्रहण 3 मार्च, 2026 को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा और शाम 6 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगा। इस प्रकार, ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 27 मिनट की रहेगी।
सूतक काल का आरंभ: चंद्र ग्रहण में सूतक काल ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। अतः, इस चंद्र ग्रहण का सूतक काल 3 मार्च को सुबह 6 बजकर 20 मिनट से आरंभ हो जाएगा।
सूतक काल में क्या करें और क्या न करें – विशेष सावधानियां: सूतक काल को ज्योतिष में अशुभ माना जाता है, इसलिए इस दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है:
वर्जित कार्य: पूजा-अर्चना, मूर्तियों को छूना, नए कामों की शुरुआत और किसी भी प्रकार के शुभ या मांगलिक कार्य वर्जित माने गए हैं।
भोजन और यात्रा: सूतक काल में भोजन पकाना या ग्रहण करना, साथ ही यात्रा करना भी निषिद्ध माना जाता है।
संवेदनशील व्यक्तियों के लिए सलाह: गर्भवती महिलाओं, वृद्धजनों, बच्चों और रोगी-पीड़ित व्यक्तियों को इस दौरान घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। उन्हें विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
गर्भवती महिलाओं के लिए: गर्भवती महिलाओं को सूतक काल के दौरान धारदार वस्तुओं (जैसे चाकू, कैंची) का प्रयोग करने से बचना चाहिए और ग्रहण काल में बाहर न निकलें।
मंत्र जाप: इस दौरान भगवान के नाम का जाप करना या धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना शुभ माना जाता है।
भारत में कहां-कहां दिखाई देगा चंद्र ग्रहण: यह चंद्र ग्रहण देश के कुछ हिस्सों में स्पष्ट रूप से नजर आएगा। विशेष रूप से बंगाल के उत्तर-पूर्वी हिस्सों और पूर्वोत्तर राज्यों जैसे मिजोरम, नागालैंड, मणिपुर, असम और अरुणाचल प्रदेश में इसे देखा जा सकेगा। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह है। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल में भी ग्रहण दिखाई देगा। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान में आंशिक तौर पर चंद्र ग्रहण दिखाई देगा।
भारत के बाहर भी दिखेगा ग्रहण: यह चंद्र ग्रहण भारत के बाहर भी कई देशों और महाद्वीपों में देखा जा सकता है। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इराक और ईरान समेत लगभग पूरे एशिया में इसका दृश्य दिखाई देने वाला है। साथ ही, यह चंद्र ग्रहण न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका, उत्तर और दक्षिण अमेरिका और रूस जैसे देशों में भी दिखाई देगा।
ग्रहण के बाद क्या करें? सूतक काल और ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करना चाहिए, साफ कपड़े पहनने चाहिए और घर में गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए। इसके बाद देवी-देवताओं की मूर्तियों को शुद्ध करके उनकी पूजा कर सकते हैं। दान-पुण्य करना भी इस दौरान बेहद शुभ माना जाता है।






























