श्रावस्ती जिले के हरदत्त नगर गिरंट थाना क्षेत्र के भजोरेपुरवा गांव में एक सप्ताह पूर्व हुई किसान नेमराज पाठक की हत्या का मामला अब तक अनसुलझा है। रविवार देर रात करीब दो बजे चार अज्ञात बदमाशों ने घर में घुसकर लूटपाट के दौरान धारदार हथियार से हमला कर नेमराज की हत्या कर दी थी। पुलिस अभी तक हत्यारोपियों का कोई सुराग नहीं लगा पाई है। घटना के समय नेमराज अपने पुत्र सुनील पाठक और बहू लक्ष्मी पाठक के साथ घर में सो रहे थे। आहट सुनकर नेमराज की नींद खुली और उन्होंने बदमाशों का विरोध किया। इसी दौरान बदमाशों ने उन पर धारदार हथियार से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। शोर सुनकर सुनील बाहर आया तो बदमाशों ने उसके सिर पर कपड़ा डालकर हाथ-पैर बांध दिए। बहू लक्ष्मी पाठक ने बताया कि ससुर की आवाज सुनकर वह जागीं, लेकिन पति को बदमाशों के कब्जे में देख डर के मारे बेड के नीचे छिप गईं। लक्ष्मी पाठक के अनुसार, चार लोग घर में घुसे थे, जिन्होंने अलमारी और बक्सा खंगाल डाला। बदमाशों के जाने के बाद उन्होंने बाहर निकलकर शोर मचाया और पति के बंधन खोले। सूचना पर पहुंचे ग्रामीणों ने पुलिस को घटना की जानकारी दी। बताया जा रहा है कि बदमाश घर से महज दो हजार रुपये नकद और कुछ सोने-चांदी के जेवरात लूटकर फरार हो गए। लूट की कम रकम को लेकर गांव में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ ग्रामीण अंदरूनी साजिश की आशंका जता रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि नेमराज ने आरोपियों को पहचान लिया होगा, जिसके चलते उनकी हत्या की गई। गौरतलब है कि करीब पांच वर्ष पूर्व नेमराज के बड़े बेटे सुशील पाठक लापता हो गए थे। उनकी पत्नी आशा सदमे में कुछ समय बाद चल बसी थीं। इसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी नेमराज पर ही थी। आर्थिक रूप से कमजोर यह परिवार छह बीघा खेती के सहारे गुजर-बसर कर रहा था। दो वर्ष पहले ही उन्होंने छोटे बेटे की शादी की थी। एक सप्ताह बीत जाने के बावजूद पुलिस घटना का खुलासा नहीं कर पाई हैं, हालांकि पुलिस का कहना है कि जल्द ही खुलासा किया जाएगा।
श्रावस्ती में किसान की हत्या का खुलासा नहीं:लूट के दौरान हुआ था हमला, 1 हफ्ते बाद भी आरोपियों तक नहीं पहुंची पुलिस
श्रावस्ती जिले के हरदत्त नगर गिरंट थाना क्षेत्र के भजोरेपुरवा गांव में एक सप्ताह पूर्व हुई किसान नेमराज पाठक की हत्या का मामला अब तक अनसुलझा है। रविवार देर रात करीब दो बजे चार अज्ञात बदमाशों ने घर में घुसकर लूटपाट के दौरान धारदार हथियार से हमला कर नेमराज की हत्या कर दी थी। पुलिस अभी तक हत्यारोपियों का कोई सुराग नहीं लगा पाई है। घटना के समय नेमराज अपने पुत्र सुनील पाठक और बहू लक्ष्मी पाठक के साथ घर में सो रहे थे। आहट सुनकर नेमराज की नींद खुली और उन्होंने बदमाशों का विरोध किया। इसी दौरान बदमाशों ने उन पर धारदार हथियार से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। शोर सुनकर सुनील बाहर आया तो बदमाशों ने उसके सिर पर कपड़ा डालकर हाथ-पैर बांध दिए। बहू लक्ष्मी पाठक ने बताया कि ससुर की आवाज सुनकर वह जागीं, लेकिन पति को बदमाशों के कब्जे में देख डर के मारे बेड के नीचे छिप गईं। लक्ष्मी पाठक के अनुसार, चार लोग घर में घुसे थे, जिन्होंने अलमारी और बक्सा खंगाल डाला। बदमाशों के जाने के बाद उन्होंने बाहर निकलकर शोर मचाया और पति के बंधन खोले। सूचना पर पहुंचे ग्रामीणों ने पुलिस को घटना की जानकारी दी। बताया जा रहा है कि बदमाश घर से महज दो हजार रुपये नकद और कुछ सोने-चांदी के जेवरात लूटकर फरार हो गए। लूट की कम रकम को लेकर गांव में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ ग्रामीण अंदरूनी साजिश की आशंका जता रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि नेमराज ने आरोपियों को पहचान लिया होगा, जिसके चलते उनकी हत्या की गई। गौरतलब है कि करीब पांच वर्ष पूर्व नेमराज के बड़े बेटे सुशील पाठक लापता हो गए थे। उनकी पत्नी आशा सदमे में कुछ समय बाद चल बसी थीं। इसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी नेमराज पर ही थी। आर्थिक रूप से कमजोर यह परिवार छह बीघा खेती के सहारे गुजर-बसर कर रहा था। दो वर्ष पहले ही उन्होंने छोटे बेटे की शादी की थी। एक सप्ताह बीत जाने के बावजूद पुलिस घटना का खुलासा नहीं कर पाई हैं, हालांकि पुलिस का कहना है कि जल्द ही खुलासा किया जाएगा।






























