नई दिल्ली. मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते कूटनीतिक और सैन्य तनाव ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है. न्यूक्लियर डील को लेकर जारी बातचीत और हालिया विरोध प्रदर्शनों के बीच हालात संवेदनशील बने हुए हैं. इसी बीच अब भारत सरकार ने ईरान में रह रहे भारतीयों के लिए एक नई एडवाइजरी जारी करते हुए उन्हें जल्द से जल्द ईरान छोड़ने की सलाह दी है. सरकार ने अपनी एडवाइजरी में कहा है कि ईरान में मौजूद भारतीय कमर्शियल फ्लाइट समेत हर तरह के उपलब्ध साधनों का उपयोग करके जितना जल्दी हो सके ईरान से निकल जाए.
ईरान और अमेरिका के बीच न्यूक्लियर कार्यक्रम को लेकर अगली अहम बैठक 26 फरवरी को जिनेवा में होने जा रही है. इसकी पुष्टि ओमान के विदेश मंत्री ने की, जिन्होंने पहले भी दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी. वार्ता का मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नई सहमति बनाना है. बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान को 10 से 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी थी कि यदि न्यूक्लियर समझौते पर सहमति नहीं बनी तो परिणाम दुर्भाग्यपूर्ण हो सकते हैं. इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी और तेज हो गई है. ईरान की ओर से भी संकेत दिए गए हैं कि वह दबाव में झुकने वाला नहीं है.
खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका ने सैन्य उपस्थिति बढ़ाई
तनाव के बीच अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है. रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने मध्य पूर्व में 13 युद्धपोत तैनात किए हैं, जिनमें एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन भी शामिल है. इसके अलावा नौ डेस्ट्रॉयर और तीन फ्रिगेट भी क्षेत्र में मौजूद हैं. इस सैन्य जमावड़े को संभावित टकराव की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और अपने हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती सैन्य गतिविधियां कूटनीतिक प्रयासों पर दबाव बना सकती हैं और गलती की गुंजाइश कम कर सकती हैं.






























