भारत में डिजिटल रोजगार का बड़ा इंजन बना यूट्यूब, 2024 में जीडीपी में 16000 करोड़ का योगदान 9.3 लाख नौकरियों को सहारा

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नई दिल्ली. भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में यूट्यूब अब केवल एक वीडियो प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि एक व्यापक आर्थिक संरचना के रूप में उभर रहा है. ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार वर्ष 2024 में यूट्यूब के क्रिएटिव इकोसिस्टम ने भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 16,000 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान दिया और लगभग 9 लाख 30 हजार पूर्णकालिक समकक्ष नौकरियों को समर्थन प्रदान किया. यह आंकड़ा उस प्लेटफॉर्म की आर्थिक शक्ति को दर्शाता है जिसकी शुरुआत कभी एक साधारण वीडियो शेयरिंग प्रयोग के रूप में हुई थी.

रिपोर्ट के अनुसार पिछले तीन वर्षों में यूट्यूब ने भारत में क्रिएटर्स, कलाकारों और मीडिया कंपनियों को 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया है. 2007 में शुरू किए गए रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल को कंपनी इस परिवर्तन की नींव मानती है. इसी मॉडल के तहत यूट्यूब पार्टनर प्रोग्राम के माध्यम से क्रिएटर्स को उनके कंटेंट से उत्पन्न विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन राजस्व का 55 प्रतिशत हिस्सा मिलता है. अध्ययन में बताया गया है कि भारत में कमाई करने वाले 63 प्रतिशत क्रिएटर्स के लिए यूट्यूब उनकी प्राथमिक आय का स्रोत बन चुका है. वर्ष 2024 में 65,000 से अधिक भारतीय चैनलों ने एक लाख रुपये से ज्यादा की आय दर्ज की.

कंपनी ने अगले दो वर्षों में भारतीय क्रिएटर्स, कलाकारों और मीडिया साझेदारों के विकास के लिए 850 करोड़ रुपये से अधिक निवेश करने की घोषणा की है. यह निवेश न केवल कंटेंट निर्माण को गति देगा, बल्कि डिजिटल उद्यमिता को भी नई दिशा देगा. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि जिन छोटे और मध्यम उद्यमों के पास यूट्यूब चैनल है, उनमें से 70 प्रतिशत ने माना कि प्लेटफॉर्म ने उनके राजस्व बढ़ाने में भूमिका निभाई. 92 प्रतिशत संगीत कंपनियों ने यूट्यूब को अपने लिए महत्वपूर्ण आय स्रोत बताया.

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यह परिवर्तन व्यक्तिगत कहानियों में भी स्पष्ट दिखाई देता है. आईआईटी रुड़की से इंजीनियरिंग स्नातक अमित शर्मा ने 2016 में ‘क्रेजी एक्सवाईजेड’ नाम से प्रयोग आधारित वीडियो अपलोड करना शुरू किया था. उनका एक वायरल वीडियो ‘बाइक बनाम रोड रोलर’ लाखों दर्शकों तक पहुंचा और एल्गोरिदमिक सिफारिशों की ताकत को उजागर किया. आज उनके चैनल के 3.39 करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर और 10 अरब से ज्यादा व्यूज हैं. उनकी आय का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा यूट्यूब से आता है. उन्होंने 30 सदस्यीय टीम और 61,000 वर्गफीट का स्टूडियो खड़ा किया है, जो दर्शाता है कि डिजिटल कंटेंट अब संगठित उद्योग का रूप ले चुका है.

तकनीकी कंटेंट क्रिएटर श्रीमणि त्रिपाठी ने डिजिटल मार्केटिंग से कंटेंट निर्माण की ओर कदम बढ़ाया. उन्होंने तकनीक को सरल और मनोरंजक शैली में प्रस्तुत कर 1.28 करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर और 4.4 अरब व्यूज अर्जित किए. उनकी आय का प्रमुख स्रोत ब्रांड साझेदारी, विज्ञापन और एफिलिएट मार्केटिंग है. इसी तरह अनीता बोकेपल्ली, जो कभी ऑफशोर ऑयल रिग पर कार्यरत थीं, ने 2017 में लाइफस्टाइल और वेलनेस कंटेंट शुरू किया. 108 सूर्य नमस्कार की चुनौती पर आधारित एक वीडियो से उनके सब्सक्राइबर तेजी से बढ़े. आज उनके 7 लाख से अधिक सब्सक्राइबर हैं और उनकी पूरी आय विज्ञापन, स्पॉन्सरशिप और ऑनलाइन योग कक्षाओं से आती है.

वित्त और कानून जैसे जटिल विषयों को सरल भाषा में समझाने वाले चैनल ‘लेबर लॉ एडवाइजर’ के संस्थापकों ने 53 लाख से अधिक सब्सक्राइबर और 1.86 अरब व्यूज हासिल किए हैं. उन्होंने ऑनलाइन कोर्स और स्टेशनरी ब्रांड भी लॉन्च किया है. यह दर्शाता है कि यूट्यूब केवल वीडियो मंच नहीं, बल्कि उद्यम विस्तार का माध्यम बन चुका है.

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संगीत और सांस्कृतिक पहुंच के मामले में भी प्लेटफॉर्म की भूमिका महत्वपूर्ण बताई गई है. 82 प्रतिशत संगीत कंपनियों ने कहा कि यूट्यूब उन्हें वैश्विक दर्शकों तक पहुंचने में मदद करता है. 81 प्रतिशत ने इसे नए कलाकारों को स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण माना. रैपर हनुमैनकाइंड का 2024 का गीत ‘बिग डॉग्स’ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा और उनके चैनल पर 27 लाख से अधिक सब्सक्राइबर और 52 करोड़ से अधिक व्यूज दर्ज हुए. गायिका जोनिता गांधी ने भी प्लेटफॉर्म को दर्शकों से सीधे जुड़ने का प्रभावी माध्यम बताया.

रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि 71 प्रतिशत उपयोगकर्ताओं ने माना कि यूट्यूब स्थानीय इतिहास और संस्कृति के संरक्षण में भूमिका निभाता है. 72 प्रतिशत उपयोगकर्ता विविध पृष्ठभूमियों के क्रिएटर्स को खोजने के लिए एल्गोरिदमिक सिफारिशों पर निर्भर रहते हैं. इस प्रकार प्लेटफॉर्म भारतीय भाषाओं, संगीत, खानपान और लोककथाओं को वैश्विक मंच प्रदान कर रहा है.

शिक्षा के क्षेत्र में भी यूट्यूब का प्रभाव व्यापक है. 98 प्रतिशत उपयोगकर्ताओं ने जानकारी और ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्लेटफॉर्म का उपयोग करने की बात कही. 73 प्रतिशत ने स्वयं को शिक्षित करने के लिए इसका नियमित उपयोग स्वीकार किया. 50 प्रतिशत उपयोगकर्ताओं ने समाचार खोजने के लिए यूट्यूब का सहारा लिया, जिनमें से 82 प्रतिशत ने विश्वसनीय स्रोत मिलने की पुष्टि की. 97 प्रतिशत शिक्षकों ने बताया कि वे कक्षा या असाइनमेंट में यूट्यूब सामग्री का उपयोग करते हैं, जबकि 93 प्रतिशत ने माना कि यह छात्रों को कक्षा के बाहर भी सीखने में मदद करता है.

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माता-पिता के बीच भी इसका प्रभाव स्पष्ट है. 76 प्रतिशत अभिभावकों ने कहा कि यूट्यूब या यूट्यूब किड्स उनके बच्चों की दुनिया को समझने में मदद करता है. 75 प्रतिशत किशोरों के माता-पिता ने माना कि प्लेटफॉर्म उनके बच्चों को समुदाय की भावना खोजने में सहायता करता है.

इन आंकड़ों के आधार पर अध्ययन यह संकेत देता है कि यूट्यूब भारत में एक समानांतर डिजिटल अर्थव्यवस्था का निर्माण कर रहा है, जहां व्यक्तिगत रचनात्मकता, एल्गोरिदमिक पहुंच और डिजिटल वितरण मिलकर रोजगार और उद्यम के नए अवसर पैदा कर रहे हैं. हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इस तीव्र विस्तार के साथ नियमन, कंटेंट गुणवत्ता और डिजिटल जिम्मेदारी जैसे मुद्दों पर संतुलित दृष्टिकोण आवश्यक होगा. फिलहाल 16,000 करोड़ रुपये का जीडीपी योगदान और 9.3 लाख नौकरियों का समर्थन इस बात का संकेत है कि भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म के इर्द-गिर्द संगठित हो रही है और यूट्यूब उसमें केंद्रीय भूमिका निभा रहा है.

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