नई दिल्ली। भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर दुनिया भर से मिली शुभकामनाओं के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने विभिन्न देशों के नेताओं और विदेश मंत्रियों का आभार जताया है और भारत के साथ सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किए गए संदेशों में जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत वैश्विक साझेदारों के साथ अपने रिश्तों को और गहराई देने के लिए प्रतिबद्ध है।
सोमवार को कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य गणतंत्र दिवस परेड के समापन के बाद विदेश मंत्री को ऑस्ट्रेलिया, आर्मेनिया, मालदीव सहित कई देशों के नेताओं से शुभकामनाएं प्राप्त हुईं। जयशंकर ने आर्मेनिया के विदेश मंत्री अरारात मिर्ज़ोयान को धन्यवाद देते हुए कहा कि वह उनके गर्मजोशी भरे संदेश की सराहना करते हैं। इसके अलावा मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला खलील और मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद को भी उन्होंने गणतंत्र दिवस की शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद दिया।
ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग के संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए जयशंकर ने उन्हें मित्र बताते हुए भारत के गणतंत्र दिवस पर शुभकामनाओं के लिए आभार व्यक्त किया। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, ये संदेश केवल औपचारिक कूटनीतिक शिष्टाचार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की बढ़ती भूमिका और प्रभाव को भी दर्शाते हैं।
इस बीच, 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय संघ की शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी ने भारत–यूरोप संबंधों को नई मजबूती दी है। परेड के समापन के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा राष्ट्रपति के अंगरक्षकों के साथ राष्ट्रपति भवन के लिए रवाना हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परंपरा के अनुसार कर्तव्य पथ पर पैदल चलते हुए दर्शकों का अभिवादन किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत के लिए यह गौरव की बात है कि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ती साझेदारी और साझा मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि यह यात्रा भारत और यूरोप के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को नई गति देगी।
उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत को एक प्रमुख वैश्विक साझेदार बताते हुए कहा कि एक सफल भारत दुनिया को अधिक स्थिर, समृद्ध और सुरक्षित बनाता है। उन्होंने गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किए जाने को अपने जीवन का सम्मान बताया और कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है।
गणतंत्र दिवस समारोह के साथ ही मंगलवार को होने वाले 16वें भारत–यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन पर भी वैश्विक निगाहें टिकी हुई हैं। यूरोपीय आयोग के उपाध्यक्ष काजा कालास और व्यापार एवं आर्थिक सुरक्षा आयुक्त मारोश शेफचोविच सहित कई वरिष्ठ यूरोपीय नेताओं ने संकेत दिए हैं कि व्यापार, सुरक्षा और रक्षा सहयोग के क्षेत्र में भारत–ईयू संबंधों में नई तेजी आने वाली है।
यूरोपीय संघ के व्यापार प्रमुख मारोश शेफचोविच ने संकेत दिया है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता अंतिम चरण में है। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष अंतिम आंकड़ों की जांच कर रहे हैं और यह समझौता दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक करारों में से एक हो सकता है। उनके अनुसार, इस समझौते से 1.4 अरब लोगों के भारतीय बाजार तक यूरोपीय कंपनियों की पहुंच आसान होगी।
शेफचोविच ने यह भी कहा कि भारत में कुछ क्षेत्रों में आयात शुल्क 150 प्रतिशत तक है, जिससे यूरोपीय निर्यातकों के लिए बाजार तक पहुंच सीमित हो जाती है। प्रस्तावित समझौते से इन बाधाओं को कम किया जा सकेगा, हालांकि कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को समझौते से बाहर रखा जाएगा। वर्तमान में लगभग 6,000 यूरोपीय कंपनियां भारत में कार्यरत हैं और पिछले एक दशक में भारत–ईयू के बीच वस्तु व्यापार में लगभग 90 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
कुल मिलाकर, गणतंत्र दिवस के अवसर पर मिली अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं यह संकेत देती हैं कि भारत न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक महत्वपूर्ण और भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभर रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर द्वारा व्यक्त किया गया आभार और सहयोग को और गहरा करने का संकल्प भारत की सक्रिय और संतुलित विदेश नीति की झलक देता है, जिसमें कूटनीति, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी को समान रूप से महत्व दिया जा रहा है।





























