नई दिल्ली. अपनी लंबे समय से लंबित मांगों, विशेष रूप से 5-डे वर्क वीक (हफ्ते में पांच दिन बैंकिंग) को लागू करने के लिए आज देशभर के बैंक कर्मचारी एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर हैं. यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के आह्वान पर बुलाई गई इस हड़ताल के कारण मंगलवार को देश के अधिकांश हिस्सों में नकद जमा, निकासी, चेक क्लियरिंग और अन्य काउंटर सेवाएं पूरी तरह ठप रहीं. दिल्ली से लेकर पटना और लखनऊ से लेकर रायपुर तक, बैंक शाखाओं के बाहर ताले लटके नजर आए और कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की.
क्यों अड़े हैं बैंक कर्मचारी?
हड़ताल में शामिल कर्मचारियों का मुख्य तर्क यह है कि जब आरबीआई, एलआईसी, सेबी और केंद्र व राज्य सरकार के अधिकांश कार्यालयों में पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू है, तो राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों को इससे बाहर क्यों रखा गया है. प्रदर्शन कर रहे बैंक अधिकारियों ने कहा कि 12वें द्विपक्षीय समझौते के दौरान यह भरोसा दिया गया था कि छह महीने के भीतर सभी शनिवारों को छुट्टी घोषित कर दी जाएगी, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी सरकार ने इस पर अंतिम मुहर नहीं लगाई है.
ग्राहकों को झेलनी पड़ रही है परेशानी
लगातार छुट्टियों (चौथा शनिवार, रविवार और गणतंत्र दिवस) के बाद मंगलवार को बैंक खुलने की उम्मीद थी, लेकिन हड़ताल के कारण ग्राहकों का इंतजार और बढ़ गया है. हालांकि, अधिकांश जगहों पर एटीएम और डिजिटल बैंकिंग सेवाएं सुचारू रूप से काम कर रही हैं, लेकिन चेक आधारित भुगतान और लोन से जुड़े जरूरी काम अटक गए हैं.
यूनियनों का अगला कदम
बैंक यूनियनों ने साफ कर दिया है कि अगर सरकार और भारतीय बैंक संघ (आईबीए) ने उनकी मांगों पर जल्द ही ठोस फैसला नहीं लिया, तो वे भविष्य में अनिश्चितकालीन हड़ताल या लंबे आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर सकते हैं. कर्मचारियों का कहना है कि वे सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना 40 मिनट अतिरिक्त काम करने को तैयार हैं, ताकि कार्यदिवस कम होने से सेवाओं पर असर न पड़े.



































