भगवान कृष्ण के कई नाम, लेकिन पहला कौन सा था? जानिए जन्म से जुड़ा रहस्य

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कृष्ण भगवान को दुनिया भर में उनके अद्भुत व्यक्तित्व, गीता में दिए गए उपदेश और बाल लीलाओं के लिए जाना जाता है. वे भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं और भक्तों के दिलों में विशेष स्थान रखते हैं. हर कोई जानना चाहता है कि उनके जीवन की शुरुआत कैसे हुई और उनका पहला नाम क्या था. कृष्ण का जीवन कई रहस्यों और अद्भुत घटनाओं से भरा हुआ है. उनका जन्म मथुरा में वासुदेव और देवकी के घर हुआ. किंवदंतियों के अनुसार, उनके जन्म के समय देवकी और वासुदेव को जेल में बंद कर दिया गया था क्योंकि उनका भाई कंस भविष्यवाणी से डर रहा था कि देवकी का आठवां पुत्र उसे मार देगा. ऐसे में कृष्ण का जन्म और उनका नाम सिर्फ एक कहानी नहीं बल्कि विश्वास, भक्ति और आदर्शों का प्रतीक बन गया. उनका पहला नाम, जिसे उनके परिवार ने रखा, कृष्ण के जीवन की गूढ़ता और उनके दिव्य स्वरूप की झलक देता है.

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कृष्ण भगवान का पहला नाम
कृष्ण भगवान का जन्म जब मथुरा में हुआ, तब उनके माता-पिता ने उन्हें “कृष्ण” नाम दिया, लेकिन जन्म के कुछ ही समय बाद, उनके पिता वासुदेव उन्हें यशोदा और नंद के घर गोकुल में छिपा ले गए. वहां उनके पालन-पोषण के लिए उन्हें अलग नाम भी दिया गया. गोकुल में उन्हें “गोविंद” और कभी-कभी “मुरारी” कहा जाता था. हालांकि, जन्म के समय माता-पिता का रखा हुआ पहला नाम “कृष्ण” ही आधिकारिक और सबसे प्रसिद्ध नाम बन गया. कृष्ण नाम का अर्थ होता है “काला या गहरा रंग”, क्योंकि उनकी त्वचा का वर्ण गहरा था. यह नाम उनकी दिव्यता और आकर्षण को भी दर्शाता है. भारतीय संस्कृति में नाम का महत्व बहुत बड़ा होता है और कृष्ण नाम उनके अद्भुत व्यक्तित्व और लीलाओं की पहचान बन गया.

जन्म और बचपन की खास बातें
कृष्ण का जन्म अष्टमी की रात को हुआ, और उनके जीवन में कई चमत्कारिक घटनाएं हुईं. जैसे ही उन्होंने जन्म लिया, जेल की बेड़ियां अपने आप खुल गईं और गार्ड्स बेहोश हो गए. वासुदेव ने रात के अंधेरे में कृष्ण को यशोदा और नंद के घर गोकुल में ले जाकर रखा. गोकुल में कृष्ण की लीलाएं बहुत प्रसिद्ध हैं. वह माखन चोरी करने, गोपियों के साथ खेलने और बछड़ों के साथ समय बिताने के लिए जाने जाते थे. उनके बचपन के नाम गोविंद और मुरारी भी इन लीलाओं में जुड़ गए. लेकिन भगवान कृष्ण का असली और सबसे पहला नाम “कृष्ण” ही माना जाता है.

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नाम का महत्व और भक्ति में प्रभाव
कृष्ण का नाम सिर्फ पहचान का साधन नहीं है. यह नाम भक्तों के लिए भक्ति और प्रेम का प्रतीक है. भक्ति की प्राचीन कथाओं में भी कृष्ण के नाम का उच्चारण और जाप करने से घर में सुख, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा आने की बात कही गई है. कृष्ण की लीलाएं, उनके खेल, गायब होने वाले माखन की कहानियां और उनके दोस्तों के साथ संबंध सब कुछ उनके नाम से जुड़ा हुआ है. उनके जीवन में पहला नाम और उसके बाद दिए गए प्यारे नाम जैसे गोविंद, मुरारी, श्याम आदि उनके व्यक्तित्व के अलग पहलुओं को दर्शाते हैं.

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कृष्ण भगवान का पहला नाम “कृष्ण” ही था, और यही नाम उनके जन्म से जुड़ी दिव्यता और अद्भुत शक्तियों का प्रतीक बन गया. उनके अन्य नाम जैसे गोविंद और मुरारी सिर्फ उनके बचपन की लीलाओं से जुड़े हैं. कृष्ण भगवान के जीवन और उनके नाम में छिपा संदेश आज भी भक्तों को भक्ति, प्रेम और नैतिकता की राह दिखाता है.

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