नई दिल्ली. वैश्विक अनिश्चितताओं, व्यापार जोखिमों और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था जिस मजबूती से आगे बढ़ रही है, उसका स्पष्ट प्रतिबिंब आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में दिखाई देता है. संसद में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए इस सर्वेक्षण पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह दस्तावेज़ भारत की “रिफॉर्म एक्सप्रेस” की वास्तविक तस्वीर पेश करता है और यह बताता है कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल के बावजूद देश निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है.
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने संदेश में कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण आज के दौर में भारत की मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक नींव, स्थिर विकास गति और राष्ट्र निर्माण में नवाचार, उद्यमिता तथा बुनियादी ढांचे की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है. उन्होंने यह भी कहा कि सर्वेक्षण समावेशी विकास के महत्व को रेखांकित करता है, जिसमें किसानों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों, युवाओं के रोजगार तथा सामाजिक कल्याण पर विशेष ध्यान दिया गया है.
प्रधानमंत्री के अनुसार, आर्थिक सर्वेक्षण केवल आंकड़ों का संकलन नहीं है, बल्कि यह आने वाले वर्षों के लिए नीति निर्माण का मार्गदर्शन करने वाला दस्तावेज़ है. उन्होंने कहा कि इसमें विनिर्माण को सशक्त करने, उत्पादकता बढ़ाने और विकसित भारत की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ने का रोडमैप भी स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया गया है. प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि सर्वेक्षण में दिए गए विश्लेषण और निष्कर्ष नीति निर्माताओं को सूचित निर्णय लेने में मदद करेंगे और भारत की आर्थिक भविष्य को लेकर भरोसा और मजबूत करेंगे.
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी आर्थिक सर्वेक्षण को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना की. उन्होंने कहा कि भारत की मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है और वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश ने उच्च विकास पथ को बनाए रखा है. उनके अनुसार, सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौजूद प्रतिकूल परिस्थितियों का सफलतापूर्वक सामना किया है और भारत की संभावित जीडीपी वृद्धि दर को बढ़ाकर 7 प्रतिशत तक ले जाने में सफलता हासिल की है.
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के प्रमुख निष्कर्षों में अनुमान लगाया गया है कि अप्रैल से शुरू होने वाले अगले वित्तीय वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रह सकती है. यह अनुमान ऐसे समय में सामने आया है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था व्यापार तनाव, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं और वित्तीय अस्थिरता से जूझ रही है. इसके बावजूद, भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बने रहने की संभावना जताई गई है.
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुमानों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.4 प्रतिशत की दर से वृद्धि की है. यह लगातार चौथा वर्ष है जब भारत ने प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज़ विकास दर्ज किया है. आर्थिक सर्वेक्षण में इस उपलब्धि को मजबूत घरेलू मांग, सार्वजनिक निवेश में वृद्धि, बुनियादी ढांचे पर जोर और संरचनात्मक सुधारों का परिणाम बताया गया है.
सर्वेक्षण में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत की संभावित विकास दर को बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया है, जो तीन वर्ष पहले किए गए 6.5 प्रतिशत के अनुमान से अधिक है. यह संकेत करता है कि देश की अर्थव्यवस्था न केवल वर्तमान में बेहतर प्रदर्शन कर रही है, बल्कि दीर्घकालिक रूप से भी इसकी विकास क्षमता में सुधार हुआ है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि संरचनात्मक सुधारों, डिजिटलीकरण, स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाओं का प्रतिफल है.
आर्थिक सर्वेक्षण में कृषि क्षेत्र की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया है. किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादकता में सुधार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए उठाए गए कदमों का सकारात्मक असर देखने को मिला है. इसके साथ ही, एमएसएमई सेक्टर को अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए सर्वेक्षण में कहा गया है कि इस क्षेत्र को सस्ता ऋण, तकनीकी सहायता और बाजार तक बेहतर पहुंच देने से रोजगार सृजन को बल मिला है.
युवा रोजगार को लेकर भी आर्थिक सर्वेक्षण में आशावादी दृष्टिकोण रखा गया है. सर्वेक्षण के अनुसार, स्टार्टअप्स, डिजिटल अर्थव्यवस्था और सेवा क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों से युवाओं के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं. सरकार द्वारा कौशल विकास और प्रशिक्षण पर किए जा रहे निवेश को भी भविष्य की विकास गाथा का अहम हिस्सा बताया गया है.
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण भारत की उस यात्रा को दर्शाता है, जिसमें सुधार, स्थिरता और समावेशी विकास एक साथ आगे बढ़ रहे हैं. उन्होंने दोहराया कि सरकार का लक्ष्य केवल आर्थिक आंकड़ों में सुधार करना नहीं, बल्कि आम नागरिक के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है. उनके अनुसार, सर्वेक्षण में दिए गए संकेत इस बात का प्रमाण हैं कि भारत सही दिशा में आगे बढ़ रहा है.
कुल मिलाकर, आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने यह स्पष्ट किया है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत आधार पर खड़ी है. सुधारों की निरंतरता, नीतिगत स्थिरता और दीर्घकालिक दृष्टि के चलते देश न केवल वर्तमान चुनौतियों का सामना कर रहा है, बल्कि भविष्य के लिए भी खुद को तैयार कर रहा है. प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री दोनों के बयानों से यह संदेश स्पष्ट है कि सरकार को भारत की आर्थिक दिशा और गति पर पूरा भरोसा है और विकसित भारत का लक्ष्य अब केवल आकांक्षा नहीं, बल्कि ठोस रणनीति के साथ आगे बढ़ता संकल्प बन चुका है.





























