नई दिल्ली.भारत और अरब देशों के विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक में केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने शनिवार को जोर देकर कहा कि आतंकवाद के खिलाफ शून्य-सहनशीलता एक “अनिवार्य सार्वभौमिक मानक” होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद से प्रभावित समाजों को अपने आप को बचाने का अधिकार है और वे इसे “स्वाभाविक रूप से” लागू करेंगे। जयशंकर ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद स्वीकार्य नहीं है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों और कूटनीति के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। उन्होंने सभी देशों से वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया ताकि आतंकवाद की वैश्विक चुनौती से निपटा जा सके।
इस बैठक में 19 अरब लीग देशों के प्रतिनिधि शामिल थे, जिनमें सऊदी अरब, मिस्र, कुवैत और कतर प्रमुख हैं। यह बैठक 2016 में पहली बैठक के बाद दूसरी बार आयोजित की गई थी और इसे पश्चिम एशिया में सुरक्षा और स्थिरता की चुनौतियों के बीच बुलाया गया। विदेश मंत्री जयशंकर ने बैठक का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत और अरब देशों का साझा हित क्षेत्रीय स्थिरता, शांति और समृद्धि को मजबूत करना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक के दौरान अरब दुनिया को भारत का “विस्तारित पड़ोस” बताया और कहा कि यह क्षेत्र सभ्यता और संस्कृति के बंधनों के माध्यम से भारत से जुड़ा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किया कि प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, व्यापार और नवाचार में सहयोग बढ़ाने से दोनों पक्षों के बीच साझेदारी नई ऊँचाइयों तक जाएगी। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर यह भी कहा कि भारत और अरब देशों के बीच आपसी विश्वास और सहयोग का इतिहास लंबा और मजबूत रहा है।
जयशंकर ने बैठक में कहा कि गाजा संघर्ष को समाप्त करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 पर आधारित व्यापक योजना को आगे बढ़ाना सभी के लिए साझा प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों ने इस योजना पर अलग-अलग या सामूहिक रूप से नीति घोषणाएँ की हैं और इसे लागू करना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी और जनसांख्यिकी में हो रहे परिवर्तन ने क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता पर व्यापक प्रभाव डाला है। पश्चिम एशिया में यह परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई देता है और यह भारत सहित सभी देशों को प्रभावित करता है।
जयशंकर ने गाजा के अलावा सूडान और यमन में चल रहे संघर्षों की स्थिति पर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि सूडान में हो रही हिंसा समाज पर गंभीर प्रभाव डाल रही है, जबकि यमन की स्थिति समुद्री नेविगेशन की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने लेबनान, लीबिया और सीरिया में हालात पर भी प्रकाश डाला और कहा कि इन देशों में शांति, स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करना साझा हित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद सभी के लिए समान खतरा है और इसे समाप्त करने के लिए वैश्विक स्तर पर सहयोग आवश्यक है।
जयशंकर ने कहा कि cross-border आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मूलभूत सिद्धांतों का उल्लंघन है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि आतंकवाद प्रभावित समाजों को आत्मरक्षा का अधिकार है और उन्हें इसे लागू करने का पूर्ण अधिकार है। उन्होंने देशों से अनुरोध किया कि आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाएं और वैश्विक स्तर पर मिलकर कार्य करें।
भारत और अरब लीग देशों के बीच पहले से ही मजबूत साझेदारी है। पश्चिम एशिया में भारतीय प्रवासी समुदाय बड़े पैमाने पर मौजूद हैं, विशेष रूप से सऊदी अरब और यूएई में। इस क्षेत्र से भारत के व्यापार, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी संबंध भी गहरे हैं। जयशंकर ने कहा कि भोजन सुरक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा के मामलों में भारत और अरब देश एक-दूसरे के लिए महत्वपूर्ण हैं। पश्चिम एशिया में करीब दस लाख भारतीय रहते हैं और अधिकांश सऊदी अरब और यूएई में केंद्रित हैं।
बैठक में 2026-28 के लिए सहयोग बढ़ाने के एजेंडे पर भी चर्चा हुई। इसमें पारंपरिक क्षेत्रों जैसे ऊर्जा, कृषि, पर्यटन और मानव संसाधन विकास के साथ-साथ डिजिटल, अंतरिक्ष, स्टार्टअप और नवाचार जैसे नए क्षेत्रों में भी सहयोग की योजना बनाई गई। जयशंकर ने कहा कि भारत तकनीकी नवाचारों और लोगों-केंद्रित तकनीकी अनुप्रयोगों में अपनी विशेषज्ञता साझा करने के लिए उत्सुक है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्षों के बीच आतंकवाद विरोधी सहयोग और संसदीय आदान-प्रदान पर भी ध्यान दिया जाएगा।
बैठक से पहले भारत और अरब देशों ने भारत-अरब चैम्बर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर की स्थापना की, ताकि व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत किया जा सके। यह पहल दोनों पक्षों के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए की गई है। जयशंकर ने कहा कि भारत और अरब देशों के बीच साझेदारी के क्षेत्र ऊर्जा, कृषि, पर्यटन, प्रौद्योगिकी और नवाचार में और विस्तार के अवसर हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता में सहयोग भी महत्वपूर्ण है।
बैठक में गाजा शांति योजना, सूडान और यमन संघर्ष और आतंकवाद की वैश्विक चुनौती पर विशेष चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों का साझा हित है। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद के खिलाफ शून्य-सहनशीलता सार्वभौमिक और अनिवार्य मानक होना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि आतंकवाद प्रभावित समाज अपने आप को बचाने का अधिकार स्वाभाविक रूप से लागू करेंगे और इसके लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय समर्थन की आवश्यकता है।
भारत-अरब विदेश मंत्रियों की यह बैठक दोनों क्षेत्रों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर साबित हुई। बैठक में संयुक्त रूप से क्षेत्रीय स्थिरता, व्यापार और निवेश के अवसरों के साथ-साथ आतंकवाद विरोधी सहयोग पर भी चर्चा हुई। जयशंकर ने वैश्विक मंच पर आतंकवाद के खिलाफ साझा प्रतिबद्धता और सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और अरब देश खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा और स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदार हैं और दोनों के बीच सहयोग से व्यापक क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित हो सकती है।
बैठक में सभी प्रतिनिधियों ने आतंकवाद, क्षेत्रीय संघर्ष और आर्थिक सहयोग के मामलों पर अपनी सहमति व्यक्त की। जयशंकर ने कहा कि भारत और अरब देशों का साझेदारी भविष्य में दोनों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी और आर्थिक, सामाजिक और सुरक्षा क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करेगी। उन्होंने बैठक में मौजूद सभी प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर साझा प्रयास किए जाएं और यह सुनिश्चित किया जाए कि आतंकवाद को कोई स्थान न मिले।
इस प्रकार भारत और अरब देशों की यह बैठक न केवल राजनीतिक और कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही, बल्कि आतंकवाद, सुरक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी निर्णायक साबित हुई। जयशंकर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक ने साफ संदेश दिया कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर कड़ा और निर्णायक रुख आवश्यक है और भारत इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा।





























