भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक बड़ा और लंबे समय से प्रतीक्षित कदम जल्द देखने को मिल सकता है। देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE अब अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) को लेकर निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। NSE के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ आशीष चौहान ने संकेत दिए हैं कि एक्सचेंज का IPO अगले 7 से 8 महीनों के भीतर बाजार में आ सकता है। उन्होंने यह जानकारी CNBC-TV18 को दिए एक इंटरव्यू में दी, जिससे निवेशकों और बाजार से जुड़े तमाम हितधारकों के बीच हलचल तेज हो गई है।
आशीष चौहान ने साफ किया है कि NSE को IPO के लिए बाजार नियामक सेबी से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट यानी NOC मिल चुका है। यह NSE के लिए एक बड़ी नियामकीय मंजूरी मानी जा रही है, क्योंकि इसका IPO पिछले कई वर्षों से विभिन्न कारणों के चलते अटका हुआ था। अब एक्सचेंज IPO की औपचारिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी DRHP तैयार करने में जुट गया है। DRHP को किसी भी कंपनी या संस्था के IPO की दिशा में सबसे अहम दस्तावेज माना जाता है।
NSE का यह IPO पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल यानी OFS के जरिए लाया जाएगा। इसका अर्थ यह है कि इस इश्यू में कोई भी नया शेयर जारी नहीं किया जाएगा, बल्कि मौजूदा शेयरहोल्डर्स अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बाजार में बेचेंगे। NSE फिलहाल अपने शेयरहोल्डर्स से शेयर वापस लेने की प्रक्रिया में भी लगा हुआ है, ताकि शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर को IPO के लिहाज से संतुलित किया जा सके। इस मॉडल के तहत एक्सचेंज को सीधे कोई नई पूंजी नहीं मिलेगी, लेकिन इससे शेयरहोल्डर्स को लिक्विडिटी का मौका मिलेगा और NSE एक लिस्टेड एंटिटी बन जाएगा।
आशीष चौहान के मुताबिक, DRHP तैयार करने में लगभग 3 से 4 महीने का समय लग सकता है। इसके बाद इसे सेबी के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जहां नियामकीय प्रक्रिया पूरी होने में अतिरिक्त 2 से 3 महीने लग सकते हैं। इस तरह पूरे प्रोसेस को जोड़कर देखा जाए तो NSE अब से करीब 7 से 8 महीनों की टाइमलाइन पर काम कर रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि एक्सचेंज का लक्ष्य इस साल के अंत तक IPO लाने का है, बशर्ते नियामकीय प्रक्रियाएं तय समय में पूरी हो जाएं।
NSE का IPO भारतीय कैपिटल मार्केट के लिए इसलिए भी खास माना जा रहा है, क्योंकि यह एक्सचेंज बाजार हिस्सेदारी के मामले में देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। इक्विटी, डेरिवेटिव्स और अन्य सेगमेंट्स में NSE का दबदबा लंबे समय से बना हुआ है। इसके बावजूद, इसका IPO पिछले आठ साल से ज्यादा समय से लंबित रहा है। NSE ने पहली बार दिसंबर 2016 में IPO का प्रॉस्पेक्टस दाखिल किया था, लेकिन इसके बाद को-लोकेशन केस और अन्य नियामकीय अड़चनों के चलते यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
को-लोकेशन केस NSE के इतिहास का सबसे विवादास्पद अध्याय माना जाता है। इस मामले में आरोप था कि एक्सचेंज ने कुछ चुनिंदा ब्रोकर्स को अपने ट्रेडिंग सिस्टम तक प्राथमिक और तेज पहुंच दी, जिससे उन्हें बाजार में अनुचित लाभ मिला। लंबे कानूनी संघर्ष के बाद NSE ने वर्ष 2025 में इस मामले के निपटारे के लिए 1,388 करोड़ रुपये का भुगतान करने का प्रस्ताव रखा था। सेबी ने NSE की ओर से दाखिल सेटलमेंट याचिका को इन-प्रिंसिपल मंजूरी दे दी, जिसके बाद IPO की राह काफी हद तक साफ हुई।
NSE की शेयरहोल्डिंग संरचना भी निवेशकों के लिए दिलचस्प है। एक्सचेंज में कई सरकारी और बीमा संस्थानों की हिस्सेदारी है। IFCI के पास स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में अपनी बहुलांश हिस्सेदारी के जरिए NSE में लगभग 2.35 प्रतिशत की इनडायरेक्ट हिस्सेदारी है। वहीं, भारतीय जीवन बीमा निगम यानी LIC के पास 10.72 प्रतिशत, जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के पास 1.64 प्रतिशत और न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी के पास 1.42 प्रतिशत हिस्सेदारी मौजूद है। IPO के जरिए इन संस्थानों को भी अपनी हिस्सेदारी भुनाने का अवसर मिल सकता है।
बजट 2026 को लेकर पूछे गए सवाल पर आशीष चौहान ने कहा कि हर साल बाजार को बजट से काफी उम्मीदें रहती हैं, लेकिन सरकार को वित्तीय अनुशासन और जिम्मेदारी बनाए रखना जरूरी है। सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स यानी STT में कटौती की संभावनाओं पर उन्होंने कहा कि बजट में जो भी फैसले लिए जाएंगे, वे NSE और पूरे कैपिटल मार्केट के लिए सकारात्मक ही होंगे।
अगर NSE का IPO तय समय पर आता है, तो यह न केवल भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि निवेशकों के लिए भी एक बड़ा अवसर लेकर आएगा। लंबे इंतजार के बाद NSE का शेयर बाजार में लिस्ट होना, भारतीय कैपिटल मार्केट की पारदर्शिता और परिपक्वता को नई ऊंचाई देने वाला कदम माना जा रहा है। अब बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि DRHP कब दाखिल होता है और सेबी से अंतिम मंजूरी कितनी तेजी से मिलती है।































