
श्रावस्ती जिले के नासिरगंज कस्बे में रात में गिरने वाली ओस से फसलें सराबोर हो रही हैं। सुबह खेतों में बिखरी नमी ने किसानों को राहत दी है। किसानों के अनुसार, ओस से रबी की दालों और तिलहन फसलों जैसे चना, मटर और सरसों को अतिरिक्त नमी मिल रही है। इससे फसलों की शुरुआती बढ़वार अच्छी होती है और सिंचाई पर निर्भरता कम होती है। सब्जियों की पत्तियां भी ताज़ा रहती हैं, उन पर जमी धूल साफ हो जाती है, और पौधे ठंडे मौसम में बेहतर स्थिति में रहते हैं। नासिरगंज के किसान बन्ने हुसैन ने बताया, “ओस वाली रातों के बाद सरसों और चने की पत्तियां बेहद ताज़ा दिखती हैं। इससे हमें एक-दो दिन के लिए सिंचाई टालने में मदद मिलती है।” अन्य किसानों जैसे सगीर अहमद, छन्नन बाबा और पप्पू ने भी पुष्टि की कि ओस के कारण उनकी सिंचाई का खर्च बच रहा है। हालांकि, कृषि विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि जहां ओस फायदेमंद है, वहीं लंबे समय तक पत्तियों का गीला रहना फफूंद लगने का खतरा बढ़ा सकता है। इसलिए, किसानों को अपनी फसलों की विशेष निगरानी करनी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर हल्की फफूंदनाशी दवाओं का उपयोग करना चाहिए। फिलहाल, ओस की यह प्राकृतिक देन गांव की फसलों को हरा-भरा बनाए हुए है, जिससे किसानों की लागत कम हो रही है, फसलों को नमी मिल रही है और उनकी उम्मीदें बढ़ रही हैं।










































