नए साल की शुरुआत के साथ ही कप्तानगंज ब्लॉक के किसानों को शीतलहर से राहत मिली है। बुधवार सुबह तेज धूप निकलने के बाद किसानों ने अपने खेतों में कृषि कार्य फिर से शुरू कर दिए हैं। पिछले कई दिनों से जारी शीतलहर, कोहरे और ठिठुरन के कारण खेतों में कृषि गतिविधियां धीमी पड़ गई थीं। मौसम में नमी और कम तापमान के कारण फसलों में कीट और फफूंद लगने की आशंका बढ़ गई थी, जिससे किसान चिंतित थे। मौसम साफ होते ही खेतों में तेजी दिखने लगी है। धान की कटाई के बाद बोई गई गेहूं, सरसों और विभिन्न सब्जियों की फसलों की सुरक्षा और बेहतर विकास के लिए किसान दवाओं का छिड़काव कर रहे हैं। खेतों में स्प्रे मशीनों की आवाजें लगातार सुनाई दे रही हैं, जहां किसान समूह में काम करते हुए एक-दूसरे का सहयोग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि मौसम में अचानक आए बदलाव के बाद दवा का छिड़काव करना बेहद आवश्यक हो गया था। यह ऊपरी सतह पर जमा नमी से पैदा होने वाले कीटों और रोगों से फसलों को सुरक्षित रखने में मदद करेगा। उनका मानना है कि यदि समय पर स्प्रे नहीं किया गया, तो उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है, जिससे पूरे सीजन की मेहनत प्रभावित हो सकती है। कृषि विभाग लगातार किसानों को सलाह दे रहा है। विभाग के अनुसार, मौसम के अनुरूप दवाओं का उपयोग करने और फसलों की नियमित निगरानी बनाए रखने से फसलें सुरक्षित रह सकती हैं। किसानों को खेतों में नमी का विशेष ध्यान रखने और आवश्यकता पड़ने पर ही सिंचाई करने की सलाह भी दी गई है। कृषि वैज्ञानिक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि खरपतवार नियंत्रण के लिए दवा डालने का उचित समय बोआई के 35 से 50 दिन के बीच होता है। इस अवधि में छिड़काव करने से फसलें खरपतवार के प्रभाव से बचती हैं और उनका विकास भी बेहतर होता है। मौसम के बदले मिजाज ने किसानों में नई उम्मीद जगाई है। किसान समय पर मेहनत और सावधानी बरतकर अपनी फसलों को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं।









































