बलरामपुर के सादुल्लाहनगर क्षेत्र में लगातार पड़ रहे घने कोहरे और ठंड से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। रबी सीजन की प्रमुख तिलहनी फसल सरसों पर कोहरे का सीधा असर दिख रहा है, जिससे खेतों में खड़ी फसल पीली पड़ने लगी है। किसानों राधेश्याम, नंदकिशोर, भानु, रमेश, नन्हा, सुरेश, पंकज और लालता सहित अन्य ने बताया कि लंबे समय तक कोहरा छाए रहने से फसलों में नमी बढ़ गई है। इससे पत्तियों में झुलसा रोग और फफूंद लगने का खतरा पैदा हो गया है। कई जगहों पर सरसों के फूल और फलियां भी झड़ने लगी हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। ग्राम पंचायतों के किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक मौसम साफ नहीं होता है, तो सरसों की खेती पूरी तरह बर्बाद हो सकती है। खाद, बीज और सिंचाई पर पहले ही भारी खर्च कर चुके किसानों को अब फसल खराब होने का डर सता रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, कोहरे के दौरान फसलों में रोग लगने की संभावना अधिक होती है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि वे नियमित रूप से खेतों की निगरानी करें और आवश्यकतानुसार उचित दवाओं का छिड़काव करें। किसानों ने प्रशासन और कृषि विभाग से मांग की है कि उन्हें समय पर तकनीकी सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए। इससे सरसों की फसल को बचाया जा सकेगा और किसानों को संभावित आर्थिक नुकसान से राहत मिल सकेगी।
सरसों की फसल पर कोहरे का असर:खेतों में पीली पड़ रही फसल, किसानों की चिंता बढ़ी
बलरामपुर के सादुल्लाहनगर क्षेत्र में लगातार पड़ रहे घने कोहरे और ठंड से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। रबी सीजन की प्रमुख तिलहनी फसल सरसों पर कोहरे का सीधा असर दिख रहा है, जिससे खेतों में खड़ी फसल पीली पड़ने लगी है। किसानों राधेश्याम, नंदकिशोर, भानु, रमेश, नन्हा, सुरेश, पंकज और लालता सहित अन्य ने बताया कि लंबे समय तक कोहरा छाए रहने से फसलों में नमी बढ़ गई है। इससे पत्तियों में झुलसा रोग और फफूंद लगने का खतरा पैदा हो गया है। कई जगहों पर सरसों के फूल और फलियां भी झड़ने लगी हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। ग्राम पंचायतों के किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक मौसम साफ नहीं होता है, तो सरसों की खेती पूरी तरह बर्बाद हो सकती है। खाद, बीज और सिंचाई पर पहले ही भारी खर्च कर चुके किसानों को अब फसल खराब होने का डर सता रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, कोहरे के दौरान फसलों में रोग लगने की संभावना अधिक होती है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि वे नियमित रूप से खेतों की निगरानी करें और आवश्यकतानुसार उचित दवाओं का छिड़काव करें। किसानों ने प्रशासन और कृषि विभाग से मांग की है कि उन्हें समय पर तकनीकी सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए। इससे सरसों की फसल को बचाया जा सकेगा और किसानों को संभावित आर्थिक नुकसान से राहत मिल सकेगी।






































