इटवा ब्लॉक के ग्राम पंचायत कम्हरिया में मनरेगा योजना के तहत कराए गए कार्यों में गंभीर अनियमितता सामने आई है। संयुक्त विकास आयुक्त, बस्ती मंडल के निर्देश पर हुई जांच में कुल 1,06,313 रुपए की अनियमितता पाई गई। इसके आधार पर ग्राम प्रधान से 33.33 प्रतिशत की दर से 35,438 रुपए की वसूली का आदेश जारी किया गया है। जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, ग्राम प्रधान को यह राशि तीन माह के भीतर सरकारी खाते में जमा करनी होगी। निर्धारित समयावधि में धनराशि जमा न होने पर भू-राजस्व की भांति वसूली की कार्रवाई की जाएगी। जांच रिपोर्ट में बताया गया कि ग्राम पंचायत कम्हरिया में तालाब की खुदाई व सफाई, चकबंदी मार्ग निर्माण और माप पुस्तिका से जुड़े कार्यों में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया। इसके अतिरिक्त, मनरेगा के तहत आवश्यक तीन स्तरीय फोटोग्राफ भी सुरक्षित नहीं पाए गए। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि मस्टर रोल में दर्ज श्रमिकों के अंगूठे के निशान एक जैसे प्रतीत हुए, जबकि किसी भी श्रमिक के अंगूठे के निशान का सत्यापन नहीं हो सका। जांच के दौरान ग्राम प्रधान की ओर से अपने तर्कों के समर्थन में कोई ठोस तकनीकी दस्तावेज या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। जिला पंचायत राज अधिकारी वाचस्पति झा ने बताया कि जांच में अनियमितता की पुष्टि होने के बाद जिलाधिकारी ने ग्राम प्रधान से धन वसूली की कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं। प्रशासन इस मामले में सख्ती बरत रहा है।
मनरेगा में अनियमितता, ग्राम प्रधान से वसूली:सिद्धार्थनगर में जिलाधिकारी ने 35,438 रुपये जमा करने के दिए आदेश
इटवा ब्लॉक के ग्राम पंचायत कम्हरिया में मनरेगा योजना के तहत कराए गए कार्यों में गंभीर अनियमितता सामने आई है। संयुक्त विकास आयुक्त, बस्ती मंडल के निर्देश पर हुई जांच में कुल 1,06,313 रुपए की अनियमितता पाई गई। इसके आधार पर ग्राम प्रधान से 33.33 प्रतिशत की दर से 35,438 रुपए की वसूली का आदेश जारी किया गया है। जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, ग्राम प्रधान को यह राशि तीन माह के भीतर सरकारी खाते में जमा करनी होगी। निर्धारित समयावधि में धनराशि जमा न होने पर भू-राजस्व की भांति वसूली की कार्रवाई की जाएगी। जांच रिपोर्ट में बताया गया कि ग्राम पंचायत कम्हरिया में तालाब की खुदाई व सफाई, चकबंदी मार्ग निर्माण और माप पुस्तिका से जुड़े कार्यों में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया। इसके अतिरिक्त, मनरेगा के तहत आवश्यक तीन स्तरीय फोटोग्राफ भी सुरक्षित नहीं पाए गए। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि मस्टर रोल में दर्ज श्रमिकों के अंगूठे के निशान एक जैसे प्रतीत हुए, जबकि किसी भी श्रमिक के अंगूठे के निशान का सत्यापन नहीं हो सका। जांच के दौरान ग्राम प्रधान की ओर से अपने तर्कों के समर्थन में कोई ठोस तकनीकी दस्तावेज या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। जिला पंचायत राज अधिकारी वाचस्पति झा ने बताया कि जांच में अनियमितता की पुष्टि होने के बाद जिलाधिकारी ने ग्राम प्रधान से धन वसूली की कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं। प्रशासन इस मामले में सख्ती बरत रहा है।








































