हरैया सतघरवा स्थित वनकटवा रेंज वनकर्मियों की भारी कमी से जूझ रहा है। इस कमी के कारण लगभग 25 किलोमीटर लंबे और 7 किलोमीटर चौड़े विशाल वन क्षेत्र की सुरक्षा चुनौतीपूर्ण हो गई है। रेंज में वर्तमान में केवल तीन वनरक्षक, राजू यादव, मनीष सिंह, देवानंद मिश्रा और राज प्रताप तैनात हैं। इनके साथ रेंजर शत्रुघ्न लाल और डिप्टी रेंजर के.के. द्विवेदी मिलकर 7 बीटों की रखवाली कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, वन दरोगा जीव रखन प्रसाद 31 जनवरी को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिससे स्टाफ की कमी और बढ़ जाएगी। वनकटवा रेंज में रहटावल, टिकुलीगढ़ पश्चिमी, पूर्वी, खैरमान दक्षिणी, उत्तरी, पिपरा और चौधरी डीह जैसे 7 बीट शामिल हैं। इसके तीन सेक्शन रहटावल, वनकटवा और पिपरा हैं। इस बड़े वन क्षेत्र में वन्यजीवों, विशेषकर ग्रामीण इलाकों में तेंदुओं से बचाव की जिम्मेदारी निभाना मौजूदा स्टाफ के लिए मुश्किल हो रहा है। रेंजर शत्रुघ्न लाल ने बताया कि वनकर्मियों की कमी के संबंध में उच्च अधिकारियों को नियमित रूप से सूचना भेजी जा रही है।
वनकटवा रेंज में वनकर्मियों की भारी कमी:25 किमी वन क्षेत्र की सुरक्षा में चुनौती, स्थानीयों लोगों ने की मांग
हरैया सतघरवा स्थित वनकटवा रेंज वनकर्मियों की भारी कमी से जूझ रहा है। इस कमी के कारण लगभग 25 किलोमीटर लंबे और 7 किलोमीटर चौड़े विशाल वन क्षेत्र की सुरक्षा चुनौतीपूर्ण हो गई है। रेंज में वर्तमान में केवल तीन वनरक्षक, राजू यादव, मनीष सिंह, देवानंद मिश्रा और राज प्रताप तैनात हैं। इनके साथ रेंजर शत्रुघ्न लाल और डिप्टी रेंजर के.के. द्विवेदी मिलकर 7 बीटों की रखवाली कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, वन दरोगा जीव रखन प्रसाद 31 जनवरी को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिससे स्टाफ की कमी और बढ़ जाएगी। वनकटवा रेंज में रहटावल, टिकुलीगढ़ पश्चिमी, पूर्वी, खैरमान दक्षिणी, उत्तरी, पिपरा और चौधरी डीह जैसे 7 बीट शामिल हैं। इसके तीन सेक्शन रहटावल, वनकटवा और पिपरा हैं। इस बड़े वन क्षेत्र में वन्यजीवों, विशेषकर ग्रामीण इलाकों में तेंदुओं से बचाव की जिम्मेदारी निभाना मौजूदा स्टाफ के लिए मुश्किल हो रहा है। रेंजर शत्रुघ्न लाल ने बताया कि वनकर्मियों की कमी के संबंध में उच्च अधिकारियों को नियमित रूप से सूचना भेजी जा रही है।









































