बलरामपुर में अल्लाह के प्यारे रसूल और इस्लाम धर्म के चौथे खलीफा व पहले इमाम हजरत अली का यौमे पैदाइश (जन्मदिन) अकीदतमंदों ने धूमधाम से मनाया। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, रजब महीने की 13 तारीख को हजरत अली का जन्म हुआ था। इस अवसर पर नगर में ‘जुलूस-ए-मौला-ए-कायनात’ बड़े ही अकीदत के साथ निकाला गया।जुलूस में शामिल अकीदतमंदों के ‘या-अली, मौला अली’ के नारों से शहर गूंज उठा। यह जुलूस अपने परंपरागत मार्गों से होते हुए देर शाम बाबा हुरमत शाह की दरगाह पर पहुंचा। दरगाह में अकीदतमंदों ने फातिहा पढ़कर मुल्क व कौम की तरक्की के लिए दुआएं मांगीं।’अहले बेत-ए-अतहार फाउंडेशन’ के सदर सैयद मोहम्मद बिन जावेद के नेतृत्व में यह जुलूस निकाला गया। उन्होंने बताया कि हजरत अली का पूरा नाम अली इब्न अली तालिब है। वह पैगंबर-ए-इस्लाम मोहम्मद साहब के दामाद और चचेरे भाई भी हैं। हजरत अली का फरमान है कि खाने के वक्त यदि कोई भूखा दिखे तो सबसे पहले उसे खाना खिलाना चाहिए और सभी धर्मों के लोगों के साथ मिलजुलकर रहना चाहिए।हजरत अली के यौमे पैदाइश पर नगर के मोहल्ला यतीम खाना से दोपहर 2 बजे जुलूस-ए-मौला-ए-कायनात धूमधाम से निकला। जुलूस में खान-ए-काबा, मदीना, नजफ, वारिस पाक का आस्ताना, जुल्फिकार और या अली की झांकियां लेकर लोग साथ चल रहे थे।यह जुलूस यतीम खाने से निकलकर एमपीपी इंटर कॉलेज, वीर विनय चौराहा, सराय फाटक चौक, बड़ा पुल होते हुए गुरुद्वारा के पास पहुंचा। यहां समाजवादी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष इकबाल जावेद और समाजसेवी समर जावेद ने अपने सहयोगियों के साथ जुलूस की अगुवाई कर रहे लोगों का अंग वस्त्र पहनाकर स्वागत किया और जुलूस में चल रहे लोगों को मिष्ठान खिलाकर जलपान कराया।यहां से निकलकर जुलूस गर्ल्स कॉलेज चौराहा होते हुए गदुरहवा मोहल्ले में पहुंचा। बाबा हुरमत शाह के मजार पर फातिहा पढ़ने के बाद अकीदतमंदों ने परचम कुसाई की रस्म अदा की। सभी लोगों ने मुल्क की तरक्की, आपसी भाईचारा कायम रहने और कौम की सलामती के लिए दुआ मांगकर जुलूस का समापन किया।
बलरामपुर में हजरत अली का यौमे पैदाइश मनाया:अकीदतमंदों ने निकाला जुलूस, मुल्क की तरक्की की दुआ मांगी
बलरामपुर में अल्लाह के प्यारे रसूल और इस्लाम धर्म के चौथे खलीफा व पहले इमाम हजरत अली का यौमे पैदाइश (जन्मदिन) अकीदतमंदों ने धूमधाम से मनाया। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, रजब महीने की 13 तारीख को हजरत अली का जन्म हुआ था। इस अवसर पर नगर में ‘जुलूस-ए-मौला-ए-कायनात’ बड़े ही अकीदत के साथ निकाला गया।जुलूस में शामिल अकीदतमंदों के ‘या-अली, मौला अली’ के नारों से शहर गूंज उठा। यह जुलूस अपने परंपरागत मार्गों से होते हुए देर शाम बाबा हुरमत शाह की दरगाह पर पहुंचा। दरगाह में अकीदतमंदों ने फातिहा पढ़कर मुल्क व कौम की तरक्की के लिए दुआएं मांगीं।’अहले बेत-ए-अतहार फाउंडेशन’ के सदर सैयद मोहम्मद बिन जावेद के नेतृत्व में यह जुलूस निकाला गया। उन्होंने बताया कि हजरत अली का पूरा नाम अली इब्न अली तालिब है। वह पैगंबर-ए-इस्लाम मोहम्मद साहब के दामाद और चचेरे भाई भी हैं। हजरत अली का फरमान है कि खाने के वक्त यदि कोई भूखा दिखे तो सबसे पहले उसे खाना खिलाना चाहिए और सभी धर्मों के लोगों के साथ मिलजुलकर रहना चाहिए।हजरत अली के यौमे पैदाइश पर नगर के मोहल्ला यतीम खाना से दोपहर 2 बजे जुलूस-ए-मौला-ए-कायनात धूमधाम से निकला। जुलूस में खान-ए-काबा, मदीना, नजफ, वारिस पाक का आस्ताना, जुल्फिकार और या अली की झांकियां लेकर लोग साथ चल रहे थे।यह जुलूस यतीम खाने से निकलकर एमपीपी इंटर कॉलेज, वीर विनय चौराहा, सराय फाटक चौक, बड़ा पुल होते हुए गुरुद्वारा के पास पहुंचा। यहां समाजवादी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष इकबाल जावेद और समाजसेवी समर जावेद ने अपने सहयोगियों के साथ जुलूस की अगुवाई कर रहे लोगों का अंग वस्त्र पहनाकर स्वागत किया और जुलूस में चल रहे लोगों को मिष्ठान खिलाकर जलपान कराया।यहां से निकलकर जुलूस गर्ल्स कॉलेज चौराहा होते हुए गदुरहवा मोहल्ले में पहुंचा। बाबा हुरमत शाह के मजार पर फातिहा पढ़ने के बाद अकीदतमंदों ने परचम कुसाई की रस्म अदा की। सभी लोगों ने मुल्क की तरक्की, आपसी भाईचारा कायम रहने और कौम की सलामती के लिए दुआ मांगकर जुलूस का समापन किया।









































