श्रावस्ती में शिया समुदाय ने इमाम हुसैन की मजलिस की:मौलाना तुफैल हैदर ने इमाम हुसैन की सीख पर खिताब किया

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श्रावस्ती जिले के नासिरगंज कस्बे में शिया समुदाय ने 1 मार्च को शाम 7 बजे एक मजलिस का आयोजन किया। इस मजलिस को इलाहाबाद से आए मौलाना तुफैल हैदर ने खिताब किया। मौलाना तुफैल हैदर ने इमाम हुसैन की सीख पर प्रकाश डाला, जिसमें हक, इंसाफ और इंसानियत पर अडिग रहने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने दबाव या लालच में झुकने से इनकार किया और उनका पैगाम है कि सत्ता या ताक़त के आगे सच को न बेचा जाए। मौलाना ने बताया कि ज़ुल्म के सामने चुप्पी गुनाह है और कमजोर की हिफाजत करना फर्ज है। उन्होंने सब्र, रहम और अखलाक पर भी जोर देते हुए कहा कि बदला लेने के बजाय किरदार को ऊँचा रखना चाहिए। ये बातें मजहब से परे, हर दौर में हक पर खड़े होने की याद दिलाती हैं। इमाम हुसैन के मसाएब करबला (10 मुहर्रम 61 हिजरी) की उन आज़माइशों को दर्शाते हैं, जहाँ उन्होंने और उनके साथियों-परिवार ने हक पर डटे रहने के लिए भारी क़ुर्बानी दी। इसमें पानी बंद करना, प्यास सहना, और अपने प्रियजनों की शहादत देखना शामिल था। मौलाना ने इंसानियत का अर्थ समझाते हुए कहा कि इसका मतलब दूसरों के दुख-दर्द को समझना, उनके साथ सहयोगी व्यवहार करना और जरूरत पड़ने पर मदद देना है। यह दया, ईमानदारी और बराबरी की भावना से जुड़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि हक पर चलने वाला इंसान नियम-क़ानून और इंसाफ को प्राथमिकता देता है, चाहे उसे कम फायदा हो या ज्यादा दबाव हो। इमाम हुसैन ने दबाव, लालच और ताकत के आगे झुकने से इनकार कर दिया था। उनका रुख साफ था कि हक और इंसाफ के सिद्धांतों से समझौता नहीं किया जाएगा, चाहे अंजाम कुछ भी हो। इस मजलिस में सिराज हैदर, सैफ रिजवी, नाजिम रिजवी, आकिल रिजवी, कब्बन हुसैन और जमन सहित कई लोग मौजूद रहे।
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