भनवापुर ब्लाक क्षेत्र के 31 गांवों में शनिवार को एकीकृत टीकाकरण सत्र आयोजित किया गया। इन सत्रों में 452 बच्चों का नियमित टीकाकरण किया गया, जबकि 173 गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच और टीकाकरण हुआ। सत्रों की गुणवत्ता और व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र मणि ओझा ने खुरपहवा, फत्तेपुर, भरवटिया बाजार और पड़ेरिया जीत गांवों में टीकाकरण सत्रों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सभी केंद्रों पर एएनएम, आशा बहू और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित मिलीं। एएनएम के पास अपडेटेड ड्यू लिस्ट और आवश्यक टीकाकरण सामग्री भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध थी। डॉ. ओझा ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे बच्चों का नियमित वजन करें और उम्र के अनुसार कुपोषित बच्चों की सूची तैयार करें। उन्होंने यह भी कहा कि टीकाकरण सत्रों में एएनएम से आवश्यक चिकित्सीय इलाज और परामर्श दिलवाने में सहयोग करें। डॉ. ओझा ने बताया कि कुपोषित बच्चों में संक्रामक बीमारियों का खतरा अधिक होता है। इसलिए, ऐसे बच्चों को समय पर टीकाकरण, विटामिन-ए सप्लीमेंटेशन और संतुलित पोषण उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने ग्रामीणों को जागरूक करते हुए कहा कि शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों को 12 गंभीर बीमारियों जैसे गला घोंटू, काली खांसी, टिटनेस, निमोनिया, डायरिया, दिमागी बुखार, खसरा, ट्यूबरक्यूलर मैनिंजाइटिस, पोलियो और हेपेटाइटिस-बी से बचाव के लिए टीकाकरण अनिवार्य है। उन्होंने यह भी बताया कि बच्चों को छह माह तक केवल मां का दूध पिलाना चाहिए। इसके बाद दो वर्ष तक मां के दूध के साथ पूरक आहार देना आवश्यक है। डॉ. ओझा के अनुसार, सही टीकाकरण और पोषण से शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। इस दौरान संध्या श्रीवास्तव, रेशमा, तारामती, सुमन देवी, शैल कुमारी, संगीता, शाहजहां, रुखसाना, निशा, रहमान और रुकैया सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
भनवापुर के 31 गांवों में एकीकृत टीकाकरण सत्र आयोजित:452 बच्चों और 173 गर्भवती महिलाओं को मिला लाभ
भनवापुर ब्लाक क्षेत्र के 31 गांवों में शनिवार को एकीकृत टीकाकरण सत्र आयोजित किया गया। इन सत्रों में 452 बच्चों का नियमित टीकाकरण किया गया, जबकि 173 गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच और टीकाकरण हुआ। सत्रों की गुणवत्ता और व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र मणि ओझा ने खुरपहवा, फत्तेपुर, भरवटिया बाजार और पड़ेरिया जीत गांवों में टीकाकरण सत्रों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सभी केंद्रों पर एएनएम, आशा बहू और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित मिलीं। एएनएम के पास अपडेटेड ड्यू लिस्ट और आवश्यक टीकाकरण सामग्री भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध थी। डॉ. ओझा ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे बच्चों का नियमित वजन करें और उम्र के अनुसार कुपोषित बच्चों की सूची तैयार करें। उन्होंने यह भी कहा कि टीकाकरण सत्रों में एएनएम से आवश्यक चिकित्सीय इलाज और परामर्श दिलवाने में सहयोग करें। डॉ. ओझा ने बताया कि कुपोषित बच्चों में संक्रामक बीमारियों का खतरा अधिक होता है। इसलिए, ऐसे बच्चों को समय पर टीकाकरण, विटामिन-ए सप्लीमेंटेशन और संतुलित पोषण उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने ग्रामीणों को जागरूक करते हुए कहा कि शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों को 12 गंभीर बीमारियों जैसे गला घोंटू, काली खांसी, टिटनेस, निमोनिया, डायरिया, दिमागी बुखार, खसरा, ट्यूबरक्यूलर मैनिंजाइटिस, पोलियो और हेपेटाइटिस-बी से बचाव के लिए टीकाकरण अनिवार्य है। उन्होंने यह भी बताया कि बच्चों को छह माह तक केवल मां का दूध पिलाना चाहिए। इसके बाद दो वर्ष तक मां के दूध के साथ पूरक आहार देना आवश्यक है। डॉ. ओझा के अनुसार, सही टीकाकरण और पोषण से शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। इस दौरान संध्या श्रीवास्तव, रेशमा, तारामती, सुमन देवी, शैल कुमारी, संगीता, शाहजहां, रुखसाना, निशा, रहमान और रुकैया सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।









































