बहराइच के रुपईडीहा स्थित भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जांच व्यवस्था की धीमी गति से यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। यह सीमा सैकड़ों लोगों और वाहनों का प्रमुख प्रवेश द्वार है, लेकिन सीमित जांच काउंटर और कर्मचारियों की कमी के कारण दोनों ओर लंबा जाम लगना सामान्य हो गया है। सुबह से ही सीमा पर भारी भीड़ जमा हो जाती है। नेपाल से भारत और भारत से नेपाल जाने वाले यात्रियों को दो से तीन घंटे तक कतारों में खड़ा रहना पड़ता है। ठंड के मौसम में यह स्थिति महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण हो जाती है। इस अव्यवस्था का असर स्थानीय व्यापार पर भी पड़ रहा है। व्यापार मंडल अध्यक्ष शैलेश जायसवाल ने बताया कि आधुनिक आधार-आधारित पहचान प्रणाली अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है। इसके कारण मैनुअल जांच में अधिक समय लगता है, जिससे जाम की स्थिति उत्पन्न होती है। सामाजिक कार्यकर्ता योगेश शर्मा ने बताया कि प्रतिदिन लगभग 300 से अधिक वाहन इस सीमा से गुजरते हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा संसाधन इस दबाव को संभालने में अपर्याप्त हैं। शर्मा ने प्रशासन से तत्काल अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती और नए जांच काउंटर शुरू करने की मांग की है। पैदल यात्रियों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। सीमा पर उनकी लंबी कतारें प्रतिदिन देखी जा सकती हैं। यह स्थिति अब एक सामान्य दृश्य बन गई है, जिससे आम नागरिकों में असंतोष बढ़ रहा है।
रुपईडीहा बॉर्डर पर धीमी जांच, आवाजाही प्रभावित: भारत-नेपाल सीमा पर यात्रियों को घंटों इंतजार, ठंड में बढ़ी परेशानी – Sahjana(Nanpara) News
बहराइच के रुपईडीहा स्थित भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जांच व्यवस्था की धीमी गति से यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। यह सीमा सैकड़ों लोगों और वाहनों का प्रमुख प्रवेश द्वार है, लेकिन सीमित जांच काउंटर और कर्मचारियों की कमी के कारण दोनों ओर लंबा जाम लगना सामान्य हो गया है। सुबह से ही सीमा पर भारी भीड़ जमा हो जाती है। नेपाल से भारत और भारत से नेपाल जाने वाले यात्रियों को दो से तीन घंटे तक कतारों में खड़ा रहना पड़ता है। ठंड के मौसम में यह स्थिति महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण हो जाती है। इस अव्यवस्था का असर स्थानीय व्यापार पर भी पड़ रहा है। व्यापार मंडल अध्यक्ष शैलेश जायसवाल ने बताया कि आधुनिक आधार-आधारित पहचान प्रणाली अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है। इसके कारण मैनुअल जांच में अधिक समय लगता है, जिससे जाम की स्थिति उत्पन्न होती है। सामाजिक कार्यकर्ता योगेश शर्मा ने बताया कि प्रतिदिन लगभग 300 से अधिक वाहन इस सीमा से गुजरते हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा संसाधन इस दबाव को संभालने में अपर्याप्त हैं। शर्मा ने प्रशासन से तत्काल अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती और नए जांच काउंटर शुरू करने की मांग की है। पैदल यात्रियों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। सीमा पर उनकी लंबी कतारें प्रतिदिन देखी जा सकती हैं। यह स्थिति अब एक सामान्य दृश्य बन गई है, जिससे आम नागरिकों में असंतोष बढ़ रहा है।









































