महसी विकासखंड के सिंगिया नसीरपुर में 2024 में एक बहुउद्देशीय ग्राम पंचायत सचिवालय का निर्माण कराया गया था। हालांकि, निर्माण के बाद से अब तक इस सचिवालय का ताला नहीं खुला है, जिससे ग्रामीणों को सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सरकार ने ग्राम पंचायतों में सचिवालयों का निर्माण इस उद्देश्य से कराया था कि ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और ऑनलाइन सेवाओं के लिए बाहर न जाना पड़े। इन सुविधाओं में जन्म प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल, मृत्यु प्रमाण पत्र, विधवा, वृद्धा और विकलांग पेंशन जैसी सेवाएं शामिल हैं, जिन्हें गांव में ही उपलब्ध कराया जाना था। सिंघिया नसीरपुर में यह सचिवालय ऐसी जगह बनाया गया है जहां तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं है। भवन चारों ओर से खेतों से घिरा हुआ है, जिससे ग्रामीणों के लिए वहां तक पहुंचना असंभव है। इस संबंध में ग्राम पंचायत अधिकारी शत्रुहन लाल ने बताया कि सचिवालय न खुलने का मुख्य कारण वहां तक जाने के लिए रास्ते का अभाव है। उन्होंने कहा कि जब प्रस्ताव पारित हुआ था, तब वह इस गांव के प्रभारी नहीं थे। उन्होंने लेखपाल से कई बार रास्ते की पैमाइश कर रास्ता निकालने को कहा है, लेकिन प्रधान इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। वहीं, ग्राम प्रधान मोहम्मद हरीश ने बताया कि सचिवालय के निर्माण का प्रस्ताव उनके कार्यकाल में नहीं हुआ था। उन्होंने भी स्वीकार किया कि पंचायत भवन तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं है और सरकारी भूमि पर अन्य लोगों ने कब्जा कर रखा है। प्रधान ने कहा कि अब लेखपाल से कहकर इसकी पैमाइश कराई जाएगी।
महसी में बिना रास्ते के सचिवालय भवन का निर्माण: 2024 में बनकर तैयार हुआ, ताला तक खुला नहीं; टाइल्स भी टूटे – Mahsi News
महसी विकासखंड के सिंगिया नसीरपुर में 2024 में एक बहुउद्देशीय ग्राम पंचायत सचिवालय का निर्माण कराया गया था। हालांकि, निर्माण के बाद से अब तक इस सचिवालय का ताला नहीं खुला है, जिससे ग्रामीणों को सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सरकार ने ग्राम पंचायतों में सचिवालयों का निर्माण इस उद्देश्य से कराया था कि ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और ऑनलाइन सेवाओं के लिए बाहर न जाना पड़े। इन सुविधाओं में जन्म प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल, मृत्यु प्रमाण पत्र, विधवा, वृद्धा और विकलांग पेंशन जैसी सेवाएं शामिल हैं, जिन्हें गांव में ही उपलब्ध कराया जाना था। सिंघिया नसीरपुर में यह सचिवालय ऐसी जगह बनाया गया है जहां तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं है। भवन चारों ओर से खेतों से घिरा हुआ है, जिससे ग्रामीणों के लिए वहां तक पहुंचना असंभव है। इस संबंध में ग्राम पंचायत अधिकारी शत्रुहन लाल ने बताया कि सचिवालय न खुलने का मुख्य कारण वहां तक जाने के लिए रास्ते का अभाव है। उन्होंने कहा कि जब प्रस्ताव पारित हुआ था, तब वह इस गांव के प्रभारी नहीं थे। उन्होंने लेखपाल से कई बार रास्ते की पैमाइश कर रास्ता निकालने को कहा है, लेकिन प्रधान इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। वहीं, ग्राम प्रधान मोहम्मद हरीश ने बताया कि सचिवालय के निर्माण का प्रस्ताव उनके कार्यकाल में नहीं हुआ था। उन्होंने भी स्वीकार किया कि पंचायत भवन तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं है और सरकारी भूमि पर अन्य लोगों ने कब्जा कर रखा है। प्रधान ने कहा कि अब लेखपाल से कहकर इसकी पैमाइश कराई जाएगी।









































