महाराजगंज के फरेंदा ब्लॉक की ग्रामसभा डड़वार खुर्द में मनरेगा के तहत बन रही 10 लाख रुपये की सड़क और नाली के निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। ग्रामीणों ने ईंट, बालू और सीमेंट के इस्तेमाल में मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हो रहा है। सड़क और नाली की मोटाई तथा मजबूती कमजोर है। इस्तेमाल की जा रही ईंटें घटिया किस्म की हैं, बालू में मिलावट है और सीमेंट की मात्रा भी कम डाली जा रही है। इस संबंध में विकासखंड अधिकारी (बीडीओ) अतुल कुमार से शिकायत की गई, जिन्होंने केवल “काम देख लेंगे” कहकर मामले को टाल दिया। तकनीकी सहायक कन्हैया जयसवाल ने निर्माण की लागत 10 लाख रुपये बताई, लेकिन कार्ययोजना से संबंधित जानकारी देने में असमर्थता व्यक्त की। सहायक कार्यक्रम अधिकारी (एपीओ) आकाश चौरसिया ने कहा कि मनरेगा का कार्य होने के कारण तकनीकी सहायक को पूरी जानकारी है, यदि वह नहीं बताते हैं तो मैं बता दूंगा। ग्राम सचिव प्रदीप कुमार दुबे और ग्राम प्रधान प्रतिनिधि पिन्टू सहानी ने भी इस मामले पर कुछ भी कहने से इनकार करते हुए सिर्फ इतना कहा कि काम हो रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जिम्मेदार अधिकारियों और ग्राम प्रधान की मिलीभगत से सरकारी बजट का दुरुपयोग किया जा रहा है। फरेंदा ब्लॉक में मनरेगा कार्यों में अनियमितताओं के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। ग्रामीण सुभाष चंद्र, जालांधर, शंकर और राकेश ने सड़क-नाली निर्माण में इन अनियमितताओं की शिकायत की है। इसके बावजूद, निर्माण कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है, ताकि जल्द से जल्द भुगतान कराया जा सके।
फरेंदा में मनरेगा सड़क-नाली निर्माण पर सवाल: 10 लाख के कार्य में गुणवत्ता पर अधिकारी-प्रधान मौन – Pharenda News
महाराजगंज के फरेंदा ब्लॉक की ग्रामसभा डड़वार खुर्द में मनरेगा के तहत बन रही 10 लाख रुपये की सड़क और नाली के निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। ग्रामीणों ने ईंट, बालू और सीमेंट के इस्तेमाल में मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हो रहा है। सड़क और नाली की मोटाई तथा मजबूती कमजोर है। इस्तेमाल की जा रही ईंटें घटिया किस्म की हैं, बालू में मिलावट है और सीमेंट की मात्रा भी कम डाली जा रही है। इस संबंध में विकासखंड अधिकारी (बीडीओ) अतुल कुमार से शिकायत की गई, जिन्होंने केवल “काम देख लेंगे” कहकर मामले को टाल दिया। तकनीकी सहायक कन्हैया जयसवाल ने निर्माण की लागत 10 लाख रुपये बताई, लेकिन कार्ययोजना से संबंधित जानकारी देने में असमर्थता व्यक्त की। सहायक कार्यक्रम अधिकारी (एपीओ) आकाश चौरसिया ने कहा कि मनरेगा का कार्य होने के कारण तकनीकी सहायक को पूरी जानकारी है, यदि वह नहीं बताते हैं तो मैं बता दूंगा। ग्राम सचिव प्रदीप कुमार दुबे और ग्राम प्रधान प्रतिनिधि पिन्टू सहानी ने भी इस मामले पर कुछ भी कहने से इनकार करते हुए सिर्फ इतना कहा कि काम हो रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जिम्मेदार अधिकारियों और ग्राम प्रधान की मिलीभगत से सरकारी बजट का दुरुपयोग किया जा रहा है। फरेंदा ब्लॉक में मनरेगा कार्यों में अनियमितताओं के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। ग्रामीण सुभाष चंद्र, जालांधर, शंकर और राकेश ने सड़क-नाली निर्माण में इन अनियमितताओं की शिकायत की है। इसके बावजूद, निर्माण कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है, ताकि जल्द से जल्द भुगतान कराया जा सके।






































