महराजगंज के निचलौल ब्लॉक की भेड़िया ग्राम पंचायत में मनरेगा पार्क निर्माण में वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े कर रहा है। करीब 32 लाख रुपये की लागत से बने इस पार्क में कई गंभीर आरोप लगे हैं। आरोपों के अनुसार, एक ही कार्य के लिए तीन अलग-अलग एस्टीमेट तैयार किए गए। मनरेगा और ग्राम निधि, दोनों मदों से भुगतान किया गया और निजी व्यक्तियों के खातों में सीधे धनराशि भेजी गई। पार्क के नाम पर पहले मनरेगा योजना से 5.28 लाख रुपए की मजदूरी दिखाई गई। इसके बाद ग्राम निधि से 85 हजार रुपए की अतिरिक्त मजदूरी का भुगतान हुआ। मिट्टी समतलीकरण के नाम पर 1.34 लाख रुपए सीधे एक निजी व्यक्ति के खाते में भेजे गए। यह सभी भुगतान उसी भूमि पर किए गए, जिस पर पहले से ही मनरेगा पार्क का निर्माण दर्शाया गया था। मामला उजागर होने के बाद ब्लॉक स्तर पर जांच शुरू हुई। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, सचिव, ग्राम प्रधान और ब्लॉक के कुछ अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई। अब आरोप है कि उच्चाधिकारियों को गुमराह करने के लिए जांच रिपोर्ट में पार्क की भूमि को पहले तीन फीट गड्ढा बताने की तैयारी की जा रही है। इसका उद्देश्य मिट्टी और मजदूरी के भारी-भरकम भुगतान को सही ठहराना है। हालांकि, ग्रामीणों ने पुरानी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल कर इस कथित तैयारी की पोल खोल दी है। ग्रामीणों का दावा है कि निर्माण से पहले संबंधित भूमि पूरी तरह समतल थी। ऐसे में सवाल उठता है कि जब जमीन पहले से समतल थी, तो लाखों रुपए की मिट्टी और मजदूरी आखिर कहां खर्च की गई। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा खेल ब्लॉक स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत से रचा गया है। नियमों को ताक पर रखकर ग्राम निधि की राशि निजी खातों में ट्रांसफर की गई, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अब तक सिर्फ नोटिस जारी कर औपचारिकता निभा रहे हैं। ठोस कार्रवाई के अभाव में यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
महराजगंज में मनरेगा पार्क में 32 लाख की अनियमितता: एक कार्य के तीन एस्टीमेट, ग्रामीण बोले- जमीन पहले से समतल थी – Maharajganj News
महराजगंज के निचलौल ब्लॉक की भेड़िया ग्राम पंचायत में मनरेगा पार्क निर्माण में वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े कर रहा है। करीब 32 लाख रुपये की लागत से बने इस पार्क में कई गंभीर आरोप लगे हैं। आरोपों के अनुसार, एक ही कार्य के लिए तीन अलग-अलग एस्टीमेट तैयार किए गए। मनरेगा और ग्राम निधि, दोनों मदों से भुगतान किया गया और निजी व्यक्तियों के खातों में सीधे धनराशि भेजी गई। पार्क के नाम पर पहले मनरेगा योजना से 5.28 लाख रुपए की मजदूरी दिखाई गई। इसके बाद ग्राम निधि से 85 हजार रुपए की अतिरिक्त मजदूरी का भुगतान हुआ। मिट्टी समतलीकरण के नाम पर 1.34 लाख रुपए सीधे एक निजी व्यक्ति के खाते में भेजे गए। यह सभी भुगतान उसी भूमि पर किए गए, जिस पर पहले से ही मनरेगा पार्क का निर्माण दर्शाया गया था। मामला उजागर होने के बाद ब्लॉक स्तर पर जांच शुरू हुई। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, सचिव, ग्राम प्रधान और ब्लॉक के कुछ अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई। अब आरोप है कि उच्चाधिकारियों को गुमराह करने के लिए जांच रिपोर्ट में पार्क की भूमि को पहले तीन फीट गड्ढा बताने की तैयारी की जा रही है। इसका उद्देश्य मिट्टी और मजदूरी के भारी-भरकम भुगतान को सही ठहराना है। हालांकि, ग्रामीणों ने पुरानी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल कर इस कथित तैयारी की पोल खोल दी है। ग्रामीणों का दावा है कि निर्माण से पहले संबंधित भूमि पूरी तरह समतल थी। ऐसे में सवाल उठता है कि जब जमीन पहले से समतल थी, तो लाखों रुपए की मिट्टी और मजदूरी आखिर कहां खर्च की गई। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा खेल ब्लॉक स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत से रचा गया है। नियमों को ताक पर रखकर ग्राम निधि की राशि निजी खातों में ट्रांसफर की गई, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अब तक सिर्फ नोटिस जारी कर औपचारिकता निभा रहे हैं। ठोस कार्रवाई के अभाव में यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रहा है।






































