श्रावस्ती जनपद के इकौना विकास खंड क्षेत्र स्थित दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य वसुनंदी मुनिराज की अध्यक्षता में जलाभिषेक का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और जयपुर (राजस्थान) सहित विभिन्न राज्यों के जैन धर्म अनुयायियों ने भाग लिया। प्रवचन के दौरान आचार्य वसुनंदी मुनिराज ने श्रावस्ती की धरती को पुण्य एवं पवित्र बताया। उन्होंने कहा कि यह भगवान संभवनाथ की जन्मभूमि है, इसलिए वे इस धरती को शत-शत नमन करते हैं। आचार्य मुनिराज ने अपने प्रवचन में कहा कि मुक्ति महल में प्रवेश का मुख्य द्वार आचार (नैतिक आचरण) है। उन्होंने बताया कि सभी मनुष्यों में ज्ञानी मानव श्रेष्ठ होता है, और सभी ज्ञानियों में आचारवान श्रमण (साधु) श्रेष्ठ होता है। उनके अनुसार, विचार की जन्मभूमि आचार है और राष्ट्र, समाज व व्यक्ति की सर्वांगीण उन्नति का मूल आधार भी आचार ही है। सदाचार को उन्होंने एक सार्वभौमिक तत्व बताया जिसे देश और काल की सीमा में बांधा नहीं जा सकता। दिगंबर जैन मंदिर श्रावस्ती के अध्यक्ष संजीव कुमार जैन ने आचार्य मुनिराज को युग पुरुष और युग दृष्टा बताते हुए नमन किया। उन्होंने कहा कि आचार्य मुनिराज श्रवण परंपरा के ऐसे नक्षत्र हैं जो सदैव धरती को प्रकाशित करते हैं। सभा को राजेंद्र जैन (जयपुर) और महेंद्र जैन ने भी संबोधित किया। मुनिराज ने फिरोजाबाद और श्रावस्ती के संघों के साथ-साथ उपस्थित महिला मंडलों को आशीर्वाद देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर राहुल जैन, पवन जैन (नेपाल), सुनील जैन, सुरेंद्र जैन, संजीव जैन, गौरव जैन, पिंटू जैन, स्वरूप चंद जैन सहित कई जैन परिवार के सदस्य मौजूद रहे।
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