डोकम-बलुआ माइनर नहर की सफाई का कार्य शुरू हो गया है। यह सफाई गेहूं के सीजन को देखते हुए की जा रही है। हालांकि, किसानों का आरोप है कि हर साल सफाई के बावजूद नहर के अंतिम छोर (टेल) तक पानी नहीं पहुंच पाता है। उनका कहना है कि सरकार लाखों रुपये खर्च करती है, लेकिन उन्हें नहर से कोई लाभ नहीं मिल रहा है। किसानों के अनुसार, इस नहर से हजारों बीघा जमीन की सिंचाई हो सकती थी, लेकिन अब उन्हें सिंचाई के लिए पंपिंग सेट और बोरिंग पर निर्भर रहना पड़ता है। किसान ज्ञान दास चौरसिया ने बताया कि डोकम और चोरथरी के बीच ही पानी इधर-उधर बह जाता है। रामपाल मिश्रा ने सुझाव दिया कि जब तक डोकम और चोरथरी के बीच दोनों तरफ की पटरियों को ऊंचा नहीं किया जाएगा, तब तक टेल तक पानी पहुंचना असंभव है। किसान राम तीरथ के मुताबिक, जब से यह नहर बनी है, तब से आज तक टेल तक पानी नहीं पहुंचा है। यह नहर डोकम, चोरथरी, बलुआ, मल्हवार बुजुर्ग और सोनबरसा जैसे गांवों को जोड़ती है। किसानों ने शासन-प्रशासन से इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
डोकम बलुआ माइनर नहर की सफाई शुरू:टेल तक पानी न पहुंचने पर किसानों ने जांच की मांग की
डोकम-बलुआ माइनर नहर की सफाई का कार्य शुरू हो गया है। यह सफाई गेहूं के सीजन को देखते हुए की जा रही है। हालांकि, किसानों का आरोप है कि हर साल सफाई के बावजूद नहर के अंतिम छोर (टेल) तक पानी नहीं पहुंच पाता है। उनका कहना है कि सरकार लाखों रुपये खर्च करती है, लेकिन उन्हें नहर से कोई लाभ नहीं मिल रहा है। किसानों के अनुसार, इस नहर से हजारों बीघा जमीन की सिंचाई हो सकती थी, लेकिन अब उन्हें सिंचाई के लिए पंपिंग सेट और बोरिंग पर निर्भर रहना पड़ता है। किसान ज्ञान दास चौरसिया ने बताया कि डोकम और चोरथरी के बीच ही पानी इधर-उधर बह जाता है। रामपाल मिश्रा ने सुझाव दिया कि जब तक डोकम और चोरथरी के बीच दोनों तरफ की पटरियों को ऊंचा नहीं किया जाएगा, तब तक टेल तक पानी पहुंचना असंभव है। किसान राम तीरथ के मुताबिक, जब से यह नहर बनी है, तब से आज तक टेल तक पानी नहीं पहुंचा है। यह नहर डोकम, चोरथरी, बलुआ, मल्हवार बुजुर्ग और सोनबरसा जैसे गांवों को जोड़ती है। किसानों ने शासन-प्रशासन से इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।









































