निचलौल ब्लॉक क्षेत्र के भाठ इलाके में किसान कड़ाके की ठंड के बावजूद गेहूं की फसलों की सिंचाई कर रहे हैं। वे बेहतर उपज और अपनी आय बढ़ाने के उद्देश्य से खेतों में पंपिंग सेट लगाकर उर्वरकों का प्रयोग कर रहे हैं। किसान अंबरीश तिवारी, मोहनलाल मद्धेशिया, डॉ. रतनलाल श्रीवास्तव, हरिओम पांडेय और उमाशंकर पाल सहित कई किसानों ने बताया कि दिसंबर की भीषण ठंड के बावजूद वे अधिक उपज के लिए गेहूं के खेतों की सिंचाई में जुटे हैं। उनका कहना है कि समय पर सिंचाई न होने से उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए यह बेहद जरूरी है। किसानों ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि खेती में लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन फसल तैयार होने पर उन्हें उचित दाम नहीं मिल पा रहा है। ऐसी स्थिति में, यदि सिंचाई में लापरवाही बरती गई तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। एक और बड़ी समस्या जंगली जानवरों, आवारा पशुओं और नीलगायों का आतंक है। किसानों का आरोप है कि ये पशु खेतों में लगी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं और सरकार इस समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। कड़ाके की ठंड में फसलों की रखवाली करना बेहद मुश्किल हो गया है। जंगली जानवरों के कारण गेहूं, सरसों, मसूर, सब्जी और अन्य फसलों को काफी नुकसान हो रहा है। इन चुनौतियों और भीषण ठंड के बावजूद, किसान अच्छी पैदावार सुनिश्चित करने के लिए सिंचाई का कार्य जारी रखे हुए हैं।
कड़ाके की ठंड में किसान कर रहे गेहूं की सिंचाई: बेहतर उपज और आय बढ़ाने के लिए खेतों में लगा रहे पंपिंग सेट – Bahuar(Nichlaul) News
निचलौल ब्लॉक क्षेत्र के भाठ इलाके में किसान कड़ाके की ठंड के बावजूद गेहूं की फसलों की सिंचाई कर रहे हैं। वे बेहतर उपज और अपनी आय बढ़ाने के उद्देश्य से खेतों में पंपिंग सेट लगाकर उर्वरकों का प्रयोग कर रहे हैं। किसान अंबरीश तिवारी, मोहनलाल मद्धेशिया, डॉ. रतनलाल श्रीवास्तव, हरिओम पांडेय और उमाशंकर पाल सहित कई किसानों ने बताया कि दिसंबर की भीषण ठंड के बावजूद वे अधिक उपज के लिए गेहूं के खेतों की सिंचाई में जुटे हैं। उनका कहना है कि समय पर सिंचाई न होने से उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए यह बेहद जरूरी है। किसानों ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि खेती में लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन फसल तैयार होने पर उन्हें उचित दाम नहीं मिल पा रहा है। ऐसी स्थिति में, यदि सिंचाई में लापरवाही बरती गई तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। एक और बड़ी समस्या जंगली जानवरों, आवारा पशुओं और नीलगायों का आतंक है। किसानों का आरोप है कि ये पशु खेतों में लगी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं और सरकार इस समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। कड़ाके की ठंड में फसलों की रखवाली करना बेहद मुश्किल हो गया है। जंगली जानवरों के कारण गेहूं, सरसों, मसूर, सब्जी और अन्य फसलों को काफी नुकसान हो रहा है। इन चुनौतियों और भीषण ठंड के बावजूद, किसान अच्छी पैदावार सुनिश्चित करने के लिए सिंचाई का कार्य जारी रखे हुए हैं।










































