नगर पंचायत भारत भारी क्षेत्र में इन दिनों ठंड बढ़ने के साथ ही लकड़ी और कोयले के दामों में तेजी आई है। तापमान में गिरावट के कारण लोग अलाव, अंगीठी और भट्ठियों का सहारा ले रहे हैं, जिससे इनकी मांग अचानक बढ़ गई है। इस बढ़ती मांग का सीधा असर कीमतों पर पड़ा है, जिससे आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। स्थानीय बाजारों में लकड़ी की कीमतों में लगभग 20 से 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पहले 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल मिलने वाली लकड़ी अब 900 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। इसी तरह, कोयले के दाम भी दोगुने हो गए हैं, जो पहले 15 से 20 रुपये प्रति किलो बिकता था, वह अब 35 से 40 रुपये प्रति किलो मिल रहा है। इस महंगाई का सबसे अधिक असर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है। कई मजदूर और दिहाड़ी कामगारों का कहना है कि ठंड से बचाव आवश्यक है, लेकिन बढ़े हुए दाम उनकी जेब पर भारी पड़ रहे हैं। मजबूरी में लोग कम मात्रा में लकड़ी या कोयला खरीदकर ठंड से बचने का प्रयास कर रहे हैं। कुछ परिवारों ने तो खर्च कम करने के लिए पुराने कपड़े, पुआल या अन्य सस्ते साधनों का उपयोग करना शुरू कर दिया है। लकड़ी और कोयला विक्रेताओं का यह भी कहना है कि जंगलों से लकड़ी लाने पर प्रतिबंध और परिवहन खर्च बढ़ने से भी कीमतों पर असर पड़ा है। जबकि कोयले की आपूर्ति दूर-दराज के क्षेत्रों से होने के कारण भाड़ा बढ़ने से दाम बढ़े हैं। यदि ठंड का प्रकोप इसी तरह जारी रहा, तो आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं।
पारा गिरने और ठंड बढ़ने से लकड़ी-कोयले के दाम बढ़े:लकड़ी और कोयले के दाम बढ़ने से आम लोगों पर बढ़ा आर्थिक बोझ
नगर पंचायत भारत भारी क्षेत्र में इन दिनों ठंड बढ़ने के साथ ही लकड़ी और कोयले के दामों में तेजी आई है। तापमान में गिरावट के कारण लोग अलाव, अंगीठी और भट्ठियों का सहारा ले रहे हैं, जिससे इनकी मांग अचानक बढ़ गई है। इस बढ़ती मांग का सीधा असर कीमतों पर पड़ा है, जिससे आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। स्थानीय बाजारों में लकड़ी की कीमतों में लगभग 20 से 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पहले 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल मिलने वाली लकड़ी अब 900 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। इसी तरह, कोयले के दाम भी दोगुने हो गए हैं, जो पहले 15 से 20 रुपये प्रति किलो बिकता था, वह अब 35 से 40 रुपये प्रति किलो मिल रहा है। इस महंगाई का सबसे अधिक असर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है। कई मजदूर और दिहाड़ी कामगारों का कहना है कि ठंड से बचाव आवश्यक है, लेकिन बढ़े हुए दाम उनकी जेब पर भारी पड़ रहे हैं। मजबूरी में लोग कम मात्रा में लकड़ी या कोयला खरीदकर ठंड से बचने का प्रयास कर रहे हैं। कुछ परिवारों ने तो खर्च कम करने के लिए पुराने कपड़े, पुआल या अन्य सस्ते साधनों का उपयोग करना शुरू कर दिया है। लकड़ी और कोयला विक्रेताओं का यह भी कहना है कि जंगलों से लकड़ी लाने पर प्रतिबंध और परिवहन खर्च बढ़ने से भी कीमतों पर असर पड़ा है। जबकि कोयले की आपूर्ति दूर-दराज के क्षेत्रों से होने के कारण भाड़ा बढ़ने से दाम बढ़े हैं। यदि ठंड का प्रकोप इसी तरह जारी रहा, तो आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं।









































