सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग विदेशी पक्षियों से गुलजार:400 से अधिक प्रजातियां, पर्यटन का नया केंद्र

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बलरामपुर स्थित सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग इन दिनों विदेशी पक्षियों की चहचहाहट से गुलजार है। सर्दियों का मौसम प्रवासी पक्षियों के लिए अनुकूल होने के कारण यह क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों का आकर्षण केंद्र बन गया है। राष्ट्रीय पक्षी दिवस के अवसर पर सोहेलवा की यह रौनक विशेष महत्व रखती है। इस वर्ष राष्ट्रीय पक्षी दिवस की थीम ‘हर पक्षी मायने रखता है’ निर्धारित की गई है, जो पक्षी संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का संदेश देती है। सोहेलवा वन क्षेत्र जैव विविधता और पक्षियों की उपस्थिति के मामले में अत्यंत समृद्ध है। यहां पक्षियों की 400 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें कई दुर्लभ प्रवासी पक्षी भी शामिल हैं। नवंबर से जनवरी के बीच भगवानपुर, खैरमान और रजिया ताल जैसे प्राकृतिक जलाशयों में इन विदेशी पक्षियों का आगमन होता है। ये पक्षी उत्तरी यूरोप, मध्य एशिया, रूस, तिब्बत, लद्दाख और दक्षिण साइबेरिया जैसे दूरदराज के क्षेत्रों से आते हैं। इनमें पिनटेल, कामन क्रट, गैंडेवाल, कामन टील, ब्रह्मणी डक, नीलसर और लालसर जैसी प्रमुख प्रजातियां शामिल हैं, जो यहां प्रवास कर प्रजनन करती हैं। वन विभाग ने पर्यटन और पक्षी संरक्षण की संभावनाओं को देखते हुए खैरमान और रजिया ताल को संरक्षित करने की पहल की है। इसके तहत तालाबों की सफाई की गई है और पक्षियों के सुरक्षित आश्रय के लिए मिट्टी के ढेर बनाए गए हैं। सुरक्षा के लिए वनकर्मियों को तैनात किया गया है। पक्षियों की निगरानी और संरक्षण सुनिश्चित करने हेतु वाच टावर और पेट्रोलिंग ट्रैक बनाने की भी योजना है। प्रभागीय वनाधिकारी गौरव गर्ग ने बताया कि सोहेलवा क्षेत्र में कई प्राकृतिक तालाब, ताल और बंधे हैं, जहां सर्दियों में विभिन्न फ्लाई-वे जोन से पक्षी प्रवास करते हैं। चितौड़गढ़ बंधा, भगवानपुर बंधा, मोतीपुर, रामपुर ताल और पार्वती अड़गा बर्ड सेंचुरी जैसे स्थानों पर भी विदेशी पक्षियों को देखा जा सकता है।
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