
श्रावस्ती जिले के नासिरगंज कस्बे में रात को पड़ने वाली ओस (पाला) से आम के बागों को नुकसान पहुंच रहा है। किसान इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं। यह समस्या तब गंभीर हो जाती है जब सुबह देर तक पेड़ों के पत्ते, फूल और छोटे फल गीले रहते हैं और पर्याप्त हवा या धूप नहीं मिल पाती। स्थानीय किसान बन्ने हुसैन के अनुसार, ठंडी ऋतु, खासकर फरवरी-मार्च में जब आम के फल विकसित हो रहे होते हैं, तब ओस का प्रभाव अधिक देखने को मिलता है। लगातार गीले मौसम के कारण पाउडरी मिल्ड्यू, एंथ्रेक्नोज और फल-सड़न जैसी फंगल बीमारियां तेजी से फैलती हैं। ओस के कारण परागण प्रक्रिया पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। भीगे हुए पराग से बौर या फल की सेटिंग कमजोर हो सकती है, जिससे पैदावार प्रभावित होती है। इसके अलावा, यदि बाग में बहुत अधिक पानी जमा होता है, तो जड़-सड़न जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। एक अन्य किसान जाकिर हुसैन ने इन समस्याओं से निपटने के लिए कुछ उपायों का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि किसानों को सुबह के समय बाग में हवा का उचित संचार सुनिश्चित करना चाहिए। इसके लिए आसपास की खरपतवार और घनी झाड़ियों को हटाना चाहिए, साथ ही पेड़ों की छंटाई करके कैनोपी को खुला रखना चाहिए। जाकिर हुसैन ने यह भी सलाह दी कि यदि आवश्यक हो, तो बागवानी विशेषज्ञ की सलाह से फंगीसाइड स्प्रे का उपयोग करें। उन्होंने बिना विशेषज्ञ की सलाह के किसी भी प्रकार के छिड़काव से बचने पर जोर दिया। बाग को साफ-सुथरा रखना भी महत्वपूर्ण है; इसके लिए गिरे हुए फल और पत्तों को नियमित रूप से हटाते रहना चाहिए। ठंडे इलाकों में पाले से फूल और छोटे फल क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। ऐसी गंभीर स्थिति में, बड़े बागों में पेड़ों को ढकना, हल्का धुआं करना या पवन मिश्रण (विंड मशीन) का उपयोग करना जैसे उपाय अपनाए जा सकते हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, ओस का प्रभाव दोहरा होता है। हल्की नमी से फूल और फलों को तुरंत बहुत कम फायदा होता है। हालांकि, यदि पत्ते और फल देर तक गीले रहें और हवा-धूप कम मिले, तो फंगल रोगों के बढ़ने से नुकसान अधिक होता है।










































