हाईकोर्ट के जज ने बलरामपुर SP का पकड़ा झूठ:नाबालिग से रेप केस में फटकार लगाई, प्रमुख सचिव गृह को तलब किया

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नाबालिग से रेप के मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बलरामपुर एसपी को फटकार लगाई है। कोर्ट ने बलरामपुर एसपी द्वारा दायर व्यक्तिगत हलफनामे को प्रथम दृष्टया झूठा करार दिया। कहा- इसमें महत्वपूर्ण फैक्ट्स को जानबूझकर छिपाए गए हैं। कोर्ट ने यूपी के प्रमुख सचिव गृह को एक सप्ताह में एफिडेविट दाखिल करने का आदेश दिया। मामले में 15 दिसंबर को अगली सुनवाई होगी। बेंच ने नाबालिग पीड़िता के दोबारा बयान दर्ज कराए जाने के कोर्ट के आदेश को राज्य द्वारा चुनौती दिए जाने पर भी आश्चर्य व्यक्त किया। कोर्ट ने सवाल किया कि आरोपी को आपत्ति हो सकती थी, लेकिन राज्य किस आधार पर इसका विरोध कर रहा है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस बबीता रानी की बेंच ने की। दरअसल, बलरामपुर एसपी ने व्यक्तिगत हलफनामा देकर कोर्ट को बताया था कि पीड़िता और उसके पिता के पॉलीग्राफ टेस्ट का आवेदन मजिस्ट्रेट कोर्ट में विचाराधीन है। इस पर पीड़िता पक्ष ने बताया कि कोर्ट ने पॉलीग्राफ टेस्ट का आवेदन पहले ही खारिज कर दी थी। अब पूरा मामला विस्तार से पढ़िए… दरअसल, बलरामपुर में नाबालिग के साथ रेप का मामला 22 अक्टूबर 2024 को दर्ज किया गया था। इस मामले में पीड़िता का पहला बयान 28 अक्टूबर 2024 को BNS की धारा 183 के तहत दर्ज किया गया था। हालांकि, बाद में पीड़िता ने कोर्ट में बयान दिया कि पुलिस और आरोपी के दबाव की वजह से वह सही बयान नहीं दे सकी थी। इस मामले में POCSO कोर्ट ने 8 जनवरी को उसका बयान दोबारा दर्ज करने की अनुमति दी थी। 19 मार्च को दुबारा हुए बयान में पीड़िता ने स्पष्ट रूप से कहा कि आरोपी ने उसका यौन शोषण किया था। दोबारा हुए नाबालिग पीड़िता के बयान के खिलाफ राज्य की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। इसके बाद हाईकोर्ट ने 17 नवम्बर 2025 को एसपी बलरामपुर को एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद हुई विवेचना का पूरा ब्योरा हलफनामे के रूप में दाखिल करने का आदेश दिया। एसपी बलरामपुर की ओर से कोर्ट में हलफनामा दायर किया गया। एसपी की एफिडेविट में बताया गया कि पीड़िता और उसके पिता की पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए आवेदन मजिस्ट्रेट कोर्ट में विचाराधीन है। गुरुवार को लखनऊ बेंच ने सुनवाई करते हुए एफिडेविट को झूठा करार दिया। कोर्ट ने एसपी बलरामपुर को फटकारते हुए कहा कि इस एफिडेविट में कई महत्वपूर्ण फैक्ट्स छुपाए गए हैं। दरअसल, कोर्ट में पीड़िता के वकील ने बताया कि एक दिसंबर को ही मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पॉलीग्राफ टेस्ट का आवेदन खारिज कर दिया था। साथ ही बताया कि अपहरण के मामले में भी पुलिस ने निष्पक्ष जांच नहीं की है। पीड़िता के दोबारा बयान पर राज्य​ क्यों व्यथित? ​​​​​​ कोर्ट ने पीड़िता के दोबारा बयान दर्ज कराने के आदेश को राज्य द्वारा हाईकोर्ट में चुनौती पर भी नाराजगी जताई। बेंच ने कहा कि यह समझ के परे है कि राज्य एक ऐसे आदेश से कैसे व्यथित हो सकता है, जिसमें केवल पीड़िता का बयान दोबारा दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने सवाल किया कि आरोपी को आपत्ति हो सकती थी, लेकिन राज्य किस आधार पर इसका विरोध कर रहा है। कोर्ट ने पुलिस के तर्क पर भी नाराजगी जताई। कहा कि कोर्ट में पीड़िता ने बताया कि पहला बयान दबाव में दर्ज हुआ था तो पॉलीग्राफ टेस्ट क्यों कराया जाना चाहिए। जब सक्षम अदालत नया बयान लेने का निर्देश दे चुकी है तो ऐसे टेस्ट कराने का कोई औचित्य नहीं। इसके बाद कोर्ट ने यूपी सरकार के प्रमुख सचिव (गृह) को एक सप्ताह में व्यक्तिगत हलफ़नामा दाखिल करने का आदेश दिया है। साथ ही अगली सुनवाई में पेश होने का भी निर्देश दिया। एसपी बोले- हलफनामा मेरे या पूर्व एसपी के कार्यकाल का, नहीं मालूम उधर, एसपी विकास कुमार ने कहा- अब तक ये स्पष्ट नहीं हो सका कि मेरे या पूर्व एसपी के कार्यकाल में ये हलफनामा दाखिल हुआ है। इस मामले में पूरी जानकारी लेने के बाद ही कुछ कह सकूंगा। ————————————— ये खबर भी पढ़िए… अरुण गोविल बोले- मस्जिद-मदरसों में CCTV लगाए सरकार:प्रिया सरोज ने कहा- कफ सिरप सिंडिकेट में सरकार के लोग शामिल संसद के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन गुरुवार को सपा समेत तमाम विपक्षी दलों ने मकर द्वार पर प्रदर्शन किया। दिल्ली की जहरीली हवा को लेकर सांसद प्लेकार्ड लेकर मुंह पर मास्क लगाए दिखाई दिए। दोनों सदनों में इस पर चर्चा कराने की मांग की। आजमगढ़ से सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने लोकसभा में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से कहा- बनारस से जौनपुर तक 18 किमी अब भी टू-लेन रोड है। इस रास्ते सफर करने वाले लोग घंटों परेशान होते हैं। इसे जल्द से जल्द फोर लेन करा दें। उन्होंने टोल कर्मियों की मनमानी और गुंडागर्दी का मुद्दा भी उठाया। पूरा मामला पढ़िए…
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