महराजगंज जिले के फरेन्दा क्षेत्र में लगातार धूप न निकलने और बादल छाए रहने से गेहूं की फसल पर संकट गहरा गया है। पौधों का विकास रुक गया है, जमीन में नमी बनी रहने से जड़ें कमजोर हो रही हैं और पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं। किसान अपनी फसल को बचाने के लिए अतिरिक्त डोज देने को मजबूर हैं। फरेन्दा ब्लॉक के दर्जनों गांवों में किसान इस स्थिति से परेशान हैं। स्थानीय किसान रामप्रताप सिंह ने बताया कि इस बार सर्दी में धूप का नामोनिशान नहीं है, जिससे गेहूं के पौधे लंबाई में नहीं बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा, “जड़ें नरम हो गई हैं, जिससे पोषक तत्व ठीक से नहीं पहुंच पा रहे। हम यूरिया और पोटाश की अतिरिक्त डोज दे रहे हैं, लेकिन इसका फायदा कम हो रहा है।” किसानों को आशंका है कि इससे फसल की पैदावार 20-25 प्रतिशत तक घट सकती है। कृषि विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि लगातार बादल और कोहरे से सूर्य की रोशनी न मिलने के कारण पौधों में प्रकाश संश्लेषण प्रभावित हो रहा है। मिट्टी की नमी बढ़ने से जड़ों में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिससे पौधे कमजोर पड़ते हैं। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे फसल की जांच करें और जहां जरूरी हो, वहां फोलियर स्प्रे का उपयोग करें। 2 प्रतिशत यूरिया का छिड़काव और जिंक सल्फेट का मिश्रण भी उपयोगी होगा। साथ ही, जल निकासी (ड्रेनेज) में सुधार करें ताकि खेतों में पानी जमा न हो। क्षेत्र के अन्य किसान रामउजागिर और सुनील यादव ने भी ऐसी ही शिकायतें कीं। उन्होंने कहा कि वे फसल को बचाने के लिए रात-दिन खेतों में डटे रहते हैं, लेकिन अगर धूप नहीं निकली तो नुकसान तय है।
महराजगंज में धूप न निकलने से गेहूं की फसल प्रभावित: किसान चिंतित, पैदावार 25% घटने की आशंका – Pharenda News
महराजगंज जिले के फरेन्दा क्षेत्र में लगातार धूप न निकलने और बादल छाए रहने से गेहूं की फसल पर संकट गहरा गया है। पौधों का विकास रुक गया है, जमीन में नमी बनी रहने से जड़ें कमजोर हो रही हैं और पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं। किसान अपनी फसल को बचाने के लिए अतिरिक्त डोज देने को मजबूर हैं। फरेन्दा ब्लॉक के दर्जनों गांवों में किसान इस स्थिति से परेशान हैं। स्थानीय किसान रामप्रताप सिंह ने बताया कि इस बार सर्दी में धूप का नामोनिशान नहीं है, जिससे गेहूं के पौधे लंबाई में नहीं बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा, “जड़ें नरम हो गई हैं, जिससे पोषक तत्व ठीक से नहीं पहुंच पा रहे। हम यूरिया और पोटाश की अतिरिक्त डोज दे रहे हैं, लेकिन इसका फायदा कम हो रहा है।” किसानों को आशंका है कि इससे फसल की पैदावार 20-25 प्रतिशत तक घट सकती है। कृषि विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि लगातार बादल और कोहरे से सूर्य की रोशनी न मिलने के कारण पौधों में प्रकाश संश्लेषण प्रभावित हो रहा है। मिट्टी की नमी बढ़ने से जड़ों में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिससे पौधे कमजोर पड़ते हैं। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे फसल की जांच करें और जहां जरूरी हो, वहां फोलियर स्प्रे का उपयोग करें। 2 प्रतिशत यूरिया का छिड़काव और जिंक सल्फेट का मिश्रण भी उपयोगी होगा। साथ ही, जल निकासी (ड्रेनेज) में सुधार करें ताकि खेतों में पानी जमा न हो। क्षेत्र के अन्य किसान रामउजागिर और सुनील यादव ने भी ऐसी ही शिकायतें कीं। उन्होंने कहा कि वे फसल को बचाने के लिए रात-दिन खेतों में डटे रहते हैं, लेकिन अगर धूप नहीं निकली तो नुकसान तय है।


























