तुलसीपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत पिपरहवा बिशनपुर में स्थित पंचायत भवन की स्थिति बदहाल है। सरकारी अभिलेखों और ‘मेरी पंचायत’ पोर्टल के अनुसार, पिछले दो वर्षों में भवन के रंग-रोगन और मरम्मत पर ₹2 लाख से अधिक खर्च किए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई सुधार नजर नहीं आता। स्थानीय निवासियों के अनुसार, पंचायत भवन जर्जर हालत में है। इसके दरवाजे और पल्ले टूटे हुए हैं, तथा कई कमरों में कूड़े-कचरे का ढेर लगा हुआ है। भवन की लंबे समय से सफाई नहीं की गई है। यहां नियमित रूप से कोई सफाईकर्मी भी नहीं आता, जिससे भवन की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। पंचायत भवन में आवश्यक सुविधाएं लगभग नदारद हैं। वर्तमान में केवल चार कुर्सियां और एक मेज ही उपलब्ध हैं। पंचायत सहायक ने बताया कि कार्यालय के लिए न तो कोई कंप्यूटर सिस्टम, मॉनिटर या सीपीयू प्रदान किया गया है, और न ही कोई सैनिटरी या स्टेशनरी सामग्री दी जा रही है। इस कारण ग्रामीणों को पंचायत से संबंधित कार्यों में सहायता प्रदान करना मुश्किल हो गया है। एक और चिंताजनक पहलू यह है कि पंचायत भवन पर अभी तक उसका नाम अंकित नहीं किया गया है, जिससे यह स्पष्ट नहीं होता कि यह वास्तव में पंचायत कार्यालय है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब सरकारी रिकॉर्ड में इतनी बड़ी धनराशि खर्च की जा रही है, तो फिर सुविधाएं और मरम्मत कार्य जमीन पर क्यों नहीं दिख रहे हैं। इस मामले पर ग्राम पंचायत अधिकारी अनिल कुमार ने स्पष्टीकरण दिया कि चोरी की आशंका के कारण पंचायत भवन में महंगे सामान नहीं रखे जा रहे हैं। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि जल्द ही भवन की सफाई कराई जाएगी और इसकी स्थिति में सुधार किया जाएगा।
पंचायत भवन पर 2 लाख खर्च, फिर भी बदहाल:तुलसीपुर में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव
तुलसीपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत पिपरहवा बिशनपुर में स्थित पंचायत भवन की स्थिति बदहाल है। सरकारी अभिलेखों और ‘मेरी पंचायत’ पोर्टल के अनुसार, पिछले दो वर्षों में भवन के रंग-रोगन और मरम्मत पर ₹2 लाख से अधिक खर्च किए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई सुधार नजर नहीं आता। स्थानीय निवासियों के अनुसार, पंचायत भवन जर्जर हालत में है। इसके दरवाजे और पल्ले टूटे हुए हैं, तथा कई कमरों में कूड़े-कचरे का ढेर लगा हुआ है। भवन की लंबे समय से सफाई नहीं की गई है। यहां नियमित रूप से कोई सफाईकर्मी भी नहीं आता, जिससे भवन की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। पंचायत भवन में आवश्यक सुविधाएं लगभग नदारद हैं। वर्तमान में केवल चार कुर्सियां और एक मेज ही उपलब्ध हैं। पंचायत सहायक ने बताया कि कार्यालय के लिए न तो कोई कंप्यूटर सिस्टम, मॉनिटर या सीपीयू प्रदान किया गया है, और न ही कोई सैनिटरी या स्टेशनरी सामग्री दी जा रही है। इस कारण ग्रामीणों को पंचायत से संबंधित कार्यों में सहायता प्रदान करना मुश्किल हो गया है। एक और चिंताजनक पहलू यह है कि पंचायत भवन पर अभी तक उसका नाम अंकित नहीं किया गया है, जिससे यह स्पष्ट नहीं होता कि यह वास्तव में पंचायत कार्यालय है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब सरकारी रिकॉर्ड में इतनी बड़ी धनराशि खर्च की जा रही है, तो फिर सुविधाएं और मरम्मत कार्य जमीन पर क्यों नहीं दिख रहे हैं। इस मामले पर ग्राम पंचायत अधिकारी अनिल कुमार ने स्पष्टीकरण दिया कि चोरी की आशंका के कारण पंचायत भवन में महंगे सामान नहीं रखे जा रहे हैं। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि जल्द ही भवन की सफाई कराई जाएगी और इसकी स्थिति में सुधार किया जाएगा।


























