बलरामपुर जिले के गैसड़ी विकासखंड में दर्जनों गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। बुढ़ी राप्ती नदी पर पुल न होने के कारण ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी समस्या को लेकर ग्राम हरनाहवा सुस्ता सहित आसपास के गांवों के लोगों ने प्रदर्शन किया और प्रशासन से पुल निर्माण की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि पुल के अभाव में उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। बच्चों को स्कूल जाने, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और किसानों को अपने खेतों तक पहुंचने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने से स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। इस दौरान कई बार गांवों का संपर्क पूरी तरह से टूट जाता है, जिससे आपातकालीन सेवाएं भी बाधित होती हैं। ग्रामीणों ने बताया कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधियों द्वारा पुल निर्माण के कई वादे किए जाते हैं। हरनाहवा-बगनहवा मार्ग पर पुल बनाने की घोषणा भी हुई थी, लेकिन चुनाव के बाद कोई भी जनप्रतिनिधि क्षेत्र की सुध लेने नहीं पहुंचा। इस क्षेत्र से विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और विधायक चुने गए हैं, फिर भी बाढ़ग्रस्त इस इलाके की समस्याओं पर किसी ने ठोस पहल नहीं की है। पुल न होने से क्षेत्र का समग्र विकास भी बाधित हो रहा है। व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों में लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इसी नाराजगी के चलते ग्रामीणों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया और प्रशासन से शीघ्र पुल निर्माण की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द पुल निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे। इस प्रदर्शन में सागर निषाद, रामनेवास भारती, संतराम चौहान, मनतराम चौहान, कृष्ण कुमार यादव, बालकिशन यादव, बासुदेव चौहान और लालाराम भारती सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी मौजूद रहे।
बुढ़ी राप्ती नदी पर पुल नहीं, ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन:गैसड़ी विकासखंड के दर्जनों गांवों में आवागमन बाधित, प्रशासन से की मांग
बलरामपुर जिले के गैसड़ी विकासखंड में दर्जनों गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। बुढ़ी राप्ती नदी पर पुल न होने के कारण ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी समस्या को लेकर ग्राम हरनाहवा सुस्ता सहित आसपास के गांवों के लोगों ने प्रदर्शन किया और प्रशासन से पुल निर्माण की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि पुल के अभाव में उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। बच्चों को स्कूल जाने, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और किसानों को अपने खेतों तक पहुंचने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने से स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। इस दौरान कई बार गांवों का संपर्क पूरी तरह से टूट जाता है, जिससे आपातकालीन सेवाएं भी बाधित होती हैं। ग्रामीणों ने बताया कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधियों द्वारा पुल निर्माण के कई वादे किए जाते हैं। हरनाहवा-बगनहवा मार्ग पर पुल बनाने की घोषणा भी हुई थी, लेकिन चुनाव के बाद कोई भी जनप्रतिनिधि क्षेत्र की सुध लेने नहीं पहुंचा। इस क्षेत्र से विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और विधायक चुने गए हैं, फिर भी बाढ़ग्रस्त इस इलाके की समस्याओं पर किसी ने ठोस पहल नहीं की है। पुल न होने से क्षेत्र का समग्र विकास भी बाधित हो रहा है। व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों में लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इसी नाराजगी के चलते ग्रामीणों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया और प्रशासन से शीघ्र पुल निर्माण की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द पुल निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे। इस प्रदर्शन में सागर निषाद, रामनेवास भारती, संतराम चौहान, मनतराम चौहान, कृष्ण कुमार यादव, बालकिशन यादव, बासुदेव चौहान और लालाराम भारती सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी मौजूद रहे।





































