भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के लोहरौला गांव निवासी अकमल अहमद को कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में एमटेक के अंतिम वर्ष में ही असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नौकरी के प्रस्ताव मिले हैं। उन्हें यह सफलता पहले ही प्रयास में मिली है, जिसमें लगभग 10 लाख रुपये वार्षिक पैकेज का प्रस्ताव शामिल है। अकमल अहमद वर्तमान में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में एमटेक अंतिम वर्ष के छात्र हैं। उन्हें एएमयू के ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट ऑफिस के माध्यम से बेंगलुरु की दयानंद सागर यूनिवर्सिटी, गुजरात की पारुल यूनिवर्सिटी और महाराष्ट्र के जेएमएस कॉलेज से नौकरी के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों में वार्षिक पैकेज के साथ अन्य भत्ते भी शामिल हैं। मो. रईश अहमद के पुत्र अकमल की प्रारंभिक शिक्षा बलरामपुर जिले के उतरौला स्थित एमजे एक्टिविटी कॉलेज से हुई थी। वर्ष 2020 में उनका चयन एएमयू में बीटेक के लिए हुआ। उनके पिता, जो पेशे से किसान हैं, ने सीमित संसाधनों के बावजूद उनकी शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी। अकमल ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता के आशीर्वाद और गुरुजनों के मार्गदर्शन को दिया है। एक ग्रामीण युवा की इस असाधारण सफलता पर लोहरौला सहित पूरे भनवापुर ब्लॉक में खुशी का माहौल है और लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं।
लोहरौला गांव निवासी को 10 लाख पैकेज पर नौकरी:एमटेक के बाद पहले ही प्रयास में मिली सफलता, परिवार में खुशी का माहौल
भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के लोहरौला गांव निवासी अकमल अहमद को कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में एमटेक के अंतिम वर्ष में ही असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नौकरी के प्रस्ताव मिले हैं। उन्हें यह सफलता पहले ही प्रयास में मिली है, जिसमें लगभग 10 लाख रुपये वार्षिक पैकेज का प्रस्ताव शामिल है। अकमल अहमद वर्तमान में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में एमटेक अंतिम वर्ष के छात्र हैं। उन्हें एएमयू के ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट ऑफिस के माध्यम से बेंगलुरु की दयानंद सागर यूनिवर्सिटी, गुजरात की पारुल यूनिवर्सिटी और महाराष्ट्र के जेएमएस कॉलेज से नौकरी के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों में वार्षिक पैकेज के साथ अन्य भत्ते भी शामिल हैं। मो. रईश अहमद के पुत्र अकमल की प्रारंभिक शिक्षा बलरामपुर जिले के उतरौला स्थित एमजे एक्टिविटी कॉलेज से हुई थी। वर्ष 2020 में उनका चयन एएमयू में बीटेक के लिए हुआ। उनके पिता, जो पेशे से किसान हैं, ने सीमित संसाधनों के बावजूद उनकी शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी। अकमल ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता के आशीर्वाद और गुरुजनों के मार्गदर्शन को दिया है। एक ग्रामीण युवा की इस असाधारण सफलता पर लोहरौला सहित पूरे भनवापुर ब्लॉक में खुशी का माहौल है और लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं।





































