गिलौला क्षेत्र में सकट चौथ का व्रत श्रद्धापूर्वक मनाया गया:महिलाओं ने संतान की सुख-समृद्धि के लिए रखा उपवास

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गिलौला क्षेत्र में सकट चौथ का व्रत श्रद्धापूर्वक मनाया गया। माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर महिलाओं ने अपनी संतान की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली के लिए उपवास रखा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत संतान संबंधी कष्टों के निवारण और घर में सुख-शांति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस तिथि पर पूर्ण श्रद्धा से व्रत रखने से संतान से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं। दिनभर के उपवास के दौरान महिलाओं ने भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने “ऊँ गण गणपतये नमः” मंत्र का जाप किया और गणेश जी को दूर्वा अर्पित की, जिसे उन्हें अत्यंत प्रिय माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना सकट चौथ का व्रत अधूरा माना जाता है। देर रात लगभग 8:45 बजे चंद्रमा के दर्शन हुए, जिसके बाद महिलाओं ने जल अथवा दूध में अक्षत मिलाकर श्रद्धापूर्वक अर्घ्य अर्पित किया। अर्घ्य अर्पित करते समय महिलाओं ने संतान के सुख, परिवार की खुशहाली और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र देव को अर्घ्य देने से मानसिक तनाव कम होता है और मन को शांति मिलती है। अर्घ्य अर्पण के पश्चात ही व्रत का पारण शुभ माना जाता है। इस अवसर पर पूरे क्षेत्र में भक्ति और आस्था का वातावरण देखा गया।

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