जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने जिला स्वास्थ्य समिति (डीएचएस) की समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। डीएम ने स्पष्ट किया कि घर पर डिलीवरी होना व्यवस्था की विफलता है। अब किसी भी स्थिति में घर पर प्रसव नहीं होना चाहिए। ऐसा होने पर संबंधित एमओआईसी (चिकित्सा अधिकारी प्रभारी) जिम्मेदार होंगे। ये माताओं और नवजातों के जीवन से जुड़ा गंभीर मामला है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में पाई गई खामियों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जनता के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में हुई। बैठक में आयुष्मान भारत योजना की प्रगति बेहद धीमी पाई गई, जिससे बड़ी संख्या में पात्र परिवार अभी तक योजना से नहीं जुड़ पाए हैं। जिलाधिकारी ने इसे सीधे तौर पर विभागीय लापरवाही बताया। उन्होंने उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी को क्षेत्र में जाकर वास्तविक स्थिति की जांच करने और आयुष्मान केंद्रों को समय पर संचालित कराने के निर्देश दिए। डीएम ने चेतावनी दी कि यदि गरीबों के इलाज की योजना केवल कागजों तक सीमित रही तो जिम्मेदारी तय की जाएगी। बीएचएनडी दिवस, टीकाकरण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों में भी स्वास्थ्य विभाग की सुस्ती सामने आई। जिलाधिकारी ने कई स्थानों पर एएनएम, आशा और सीएचओ की निष्क्रियता पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो कर्मचारी फील्ड में काम नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाएगी। टीकाकरण में शत-प्रतिशत डेटा फीडिंग न होने और गलत मोबाइल नंबर दर्ज होने को डीएम ने एक गंभीर चूक बताया। जिलाधिकारी ने एनबीएसयू (नवजात शिशु स्थिरीकरण इकाई) के 24 घंटे सक्रिय न रहने, वार रूम की कमजोर निगरानी, इमरजेंसी रेफरल रजिस्टर की अनुपलब्धता और ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा के सीमित उपयोग पर भी स्वास्थ्य विभाग को फटकार लगाई। उन्होंने जोर देकर कहा कि योजनाएं तभी सफल होंगी जब उनका लाभ समय पर मरीजों तक पहुंचेगा।
सिद्धार्थनगर में घर पर डिलीवरी हुई तो नपेंगे अफसर:डीएम बोले- जच्चा बच्चा का मामला गंभीर, एमओआईसी होंगे जिम्मेदार
जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने जिला स्वास्थ्य समिति (डीएचएस) की समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। डीएम ने स्पष्ट किया कि घर पर डिलीवरी होना व्यवस्था की विफलता है। अब किसी भी स्थिति में घर पर प्रसव नहीं होना चाहिए। ऐसा होने पर संबंधित एमओआईसी (चिकित्सा अधिकारी प्रभारी) जिम्मेदार होंगे। ये माताओं और नवजातों के जीवन से जुड़ा गंभीर मामला है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में पाई गई खामियों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जनता के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में हुई। बैठक में आयुष्मान भारत योजना की प्रगति बेहद धीमी पाई गई, जिससे बड़ी संख्या में पात्र परिवार अभी तक योजना से नहीं जुड़ पाए हैं। जिलाधिकारी ने इसे सीधे तौर पर विभागीय लापरवाही बताया। उन्होंने उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी को क्षेत्र में जाकर वास्तविक स्थिति की जांच करने और आयुष्मान केंद्रों को समय पर संचालित कराने के निर्देश दिए। डीएम ने चेतावनी दी कि यदि गरीबों के इलाज की योजना केवल कागजों तक सीमित रही तो जिम्मेदारी तय की जाएगी। बीएचएनडी दिवस, टीकाकरण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों में भी स्वास्थ्य विभाग की सुस्ती सामने आई। जिलाधिकारी ने कई स्थानों पर एएनएम, आशा और सीएचओ की निष्क्रियता पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो कर्मचारी फील्ड में काम नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाएगी। टीकाकरण में शत-प्रतिशत डेटा फीडिंग न होने और गलत मोबाइल नंबर दर्ज होने को डीएम ने एक गंभीर चूक बताया। जिलाधिकारी ने एनबीएसयू (नवजात शिशु स्थिरीकरण इकाई) के 24 घंटे सक्रिय न रहने, वार रूम की कमजोर निगरानी, इमरजेंसी रेफरल रजिस्टर की अनुपलब्धता और ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा के सीमित उपयोग पर भी स्वास्थ्य विभाग को फटकार लगाई। उन्होंने जोर देकर कहा कि योजनाएं तभी सफल होंगी जब उनका लाभ समय पर मरीजों तक पहुंचेगा।


































