श्रावस्ती में इमाम हसन की विलादत पर महफिल:शिया समुदाय ने मनाया जश्न, पूछे गए इस्लामी सवाल

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श्रावस्ती जिले के नासिरगंज कस्बे में 15 रमज़ान को शिया समुदाय द्वारा दूसरे इमाम, हज़रत इमाम हसन अलैहिस्सलाम की विलादत (जन्मदिन) पर एक जश्ने महफिल का आयोजन किया गया। यह महफिल अम्मार रिजवी द्वारा आयोजित की गई थी और पिछले 20-25 सालों से हर साल 15 रमज़ान को होती आ रही है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिया समुदाय के लोग एकत्रित हुए। हज़रत इमाम हसन (अ.स.) पैगंबर हज़रत मोहम्मद (स.अ.व.) के बड़े नवासे और इस्लाम के दूसरे इमाम थे। वे हज़रत अली (अ.स.) और बीबी फातिमा (स.अ.) के सबसे बड़े पुत्र थे। उनका जीवन शांति, सहनशीलता और उदारता के सिद्धांतों के लिए जाना जाता है। उन्होंने मुस्लिम समुदाय में एकता और भाईचारे को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जन्म 3 हिजरी (625 ईस्वी) में मदीना में हुआ था। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, स्वयं पैगंबर मोहम्मद ने उनका नाम ‘हसन’ रखा था, जिसका अर्थ ‘सुंदर’ या ‘सदाचारी’ है। अपने पिता हज़रत अली की शहादत के बाद, वे लगभग 6 से 8 महीनों के लिए मुसलमानों के खलीफा रहे। उन्हें अपनी दानशीलता के लिए भी जाना जाता था; उन्होंने कई बार अपनी पूरी संपत्ति गरीबों में दान कर दी थी। वे इमाम हुसैन के बड़े भाई थे। उनकी शहादत 50 हिजरी (लगभग 670 ईस्वी) में मदीना में हुई। ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार, उन्हें ज़हर देकर शहीद किया गया था और उन्हें मदीना के जन्नत-उल-बकी कब्रिस्तान में दफनाया गया है। इस महफिल में इस्लामी सवाल पूछे गए और सही जवाब देने वालों को इनाम देकर सम्मानित किया गया। महफिल में ज़ैन, यूसुफ, अली खान, अर्श, आकिल रिजवी, शुजा नक़वी, मोहम्मद और ज़मन सहित कई लोगों ने कसीदे पढ़े।
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