
श्रावस्ती जनपद के मल्हीपुर थाना क्षेत्र में होली के दिन राप्ती नदी में नहाते समय चार बच्चे डूबने लगे। सेमरहनिया गांव के पास हुई इस घटना में गांव के युवक मंगली ने तीन बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। हालांकि, एक बच्ची कुमकुम लापता हो गई, जिसका शव 22 घंटे बाद भगवानपुर गांव के पास नदी किनारे रेत में दबा मिला। बच्चों को डूबता देख मंगली पुत्र सुभाष बिना देर किए नदी में कूद पड़े। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर एक-एक कर तीन बच्चों को बचाया। उनकी इस बहादुरी की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। मंगली पिछले करीब 15 वर्षों से राप्ती नदी में नाव चलाने का काम करते हैं। उनका परिवार तीन पीढ़ियों से यह काम कर रहा है। उनके दादा राजाराम ने लगभग 50 वर्षों तक नाव चलाई, जबकि उनके पिता बेचू भी करीब 25 वर्षों से इसी पेशे में हैं। तीन भाइयों में मंगली सबसे बड़े हैं। उनके दो छोटे भाई बाहर काम करते हैं। मंगली के परिवार में एक बेटा और तीन बेटियां हैं, जिन्हें वह प्राइवेट स्कूल में पढ़ा रहे हैं वे नाव चला कर ही अपने परिवार का पालन पोषण और बच्चों को पढ़ाते है। ग्रामीणों के अनुसार, मंगली इससे पहले भी कई बार लोगों की जान बचा चुके हैं और अब तक करीब 10 लोगों को नदी में डूबने से बचाया है। होली के दिन मंगली द्वारा दिखाई गई बहादुरी के लिए स्थानीय लोग उन्हें ‘असली हीरो’ बता रहे हैं। वे प्रशासन से ऐसे साहसी व्यक्ति को सम्मानित करने की मांग कर रहे हैं।











































