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सिद्धार्थनगर में कड़ाके की ठंड और तेज गलन ने जनजीवन को प्रभावित किया है। बुधवार सुबह जिले का न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि एक दिन पहले यह 7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। कोहरा न होने के बावजूद, सर्द हवाओं के कारण बढ़ी गलन ने लोगों को बेहाल कर दिया है। आवश्यक काम होने पर ही लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं। सुबह के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है। बाजार देर से खुल रहे हैं और सामान्य दिनों जैसी चहल-पहल नहीं दिख रही है। लोग ठंड से बचने के लिए शॉल, जैकेट, टोपी और मफलर का उपयोग कर रहे हैं। शाम ढलते ही गलन बढ़ने से लोग जल्दी घर लौट रहे हैं। ठंड का सर्वाधिक असर दिहाड़ी मजदूरों, ठेला-खोमचा लगाने वालों और खुले में काम करने वाले लोगों पर पड़ रहा है। ये लोग रोजी-रोटी के लिए कड़ाके की ठंड में भी बाहर निकलने को मजबूर हैं। मजदूर हैदर अली ने बताया कि परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी के कारण काम पर जाना उनकी मजबूरी है। उन्होंने कहा, “इस गलन भरी ठंड में निकलना मुश्किल है, लेकिन पेट पालने के लिए निकलना ही पड़ता है।” ठंड से राहत पाने के लिए लोग जगह-जगह अलाव का सहारा ले रहे हैं। चौराहों, बस स्टैंड, बाजारों और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर लोग अलाव के आसपास हाथ सेंकते देखे जा रहे हैं। चाय और गर्म नाश्ते की दुकानों पर भी भीड़ बढ़ गई है। कड़ाके की ठंड को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन के निर्देश पर पूरे जिले में अलाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। जिलाधिकारी ने सभी नगर पालिका और नगर पंचायतों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में अलाव की व्यवस्था सुचारु रूप से जारी रखें।
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