मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के कारण किसान अपनी तिलहनी और सब्जी की फसलों को लेकर चिंतित हैं। किसानों को आशंका है कि यदि मौसम ऐसा ही बना रहा, तो सरसों और सब्जी की फसलें बर्बाद हो सकती हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित होगा। मुंडेरवा क्षेत्र के किसान सुभाष चंद्र चौधरी और राम अज्ञा चौधरी, रानीपुर निवासी महात्मा, धर्मात्मा, परमात्मा तथा कुसम्हा जिवधरा निवासी शिवजी चौधरी सहित अन्य किसानों ने बताया कि तेज हवा और बदली भरे मौसम से सरसों और आलू की फसल पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि सरसों में फूल आने लगे हैं, और बदली से माहू तथा एफिड जैसे कीटों का संक्रमण बढ़ सकता है, जिससे फसल खराब होने का खतरा है। सरसों की फसल को लेकर कृषि विभाग के अधिकारी डॉ. बृजेश चौधरी ने किसानों को फसल बचाने के लिए दो तरह के उपाय बताए हैं। जैविक और प्राकृतिक उपायों के तहत, उन्होंने पीले स्टिक ट्रैप लगाने की सलाह दी है, जिससे माहू आकर्षित होकर चिपक जाते हैं। इसके अतिरिक्त, नीम के तेल का घोल (50 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी) बनाकर छिड़काव किया जा सकता है। डॉ. चौधरी ने लेडीबग बीटल और सिरफिड मक्खी जैसे कीटों के लिए अनुकूल वातावरण बनाने पर भी जोर दिया, क्योंकि ये कीट माहू का भक्षण करते हैं। रासायनिक उपायों में, इमिडाक्लोप्रिड का 5 मिलीलीटर प्रति 15 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। वैकल्पिक रूप से, थियामेथोक्सम का 75 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है। फूल आने की अवस्था में डाइमेथोएट का 625-1000 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव भी प्रभावी बताया गया है।









































