बहराइच के विकास खंड महसी अंतर्गत सिकंदरपुर, जोतचांदपारा, महेशपुरवा, सिपहिया प्यूली और रेहुआ मंसूर सहित दर्जनों गांवों में आवारा पशुओं का आतंक लगातार बढ़ रहा है। किसान ओमकार नाथ अवस्थी, बिनीत रामसागर और आनंद कुमार ने बताया कि दर्जनों की संख्या में आवारा पशु खेतों में घुसकर गेहूं, सरसों, आलू और मटर जैसी हरी-भरी फसलों को नष्ट कर रहे हैं। फसलें बर्बाद होने से किसानों की आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ रहा है, जिससे उनमें भारी चिंता व्याप्त है। सिपहिया प्यूली और रेहुआ मंसूर के ग्रामीण किसानों ने बताया कि इस गंभीर समस्या को लेकर उन्होंने कई बार प्रशासन और सरकार से गुहार लगाई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। किसानों की मांग है कि आवारा पशुओं को जल्द से जल्द पकड़वाकर पशु आश्रय स्थलों में भेजा जाए या किसी सुरक्षित स्थान पर रखा जाए, ताकि उनकी फसलें सुरक्षित रह सकें। किसानों का आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी इस समस्या पर चुप्पी साधे हुए हैं, जिससे उनकी परेशानी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इस संबंध में ग्राम प्रधान, सचिव, लेखपाल और तहसील प्रशासन महसी की लापरवाही सामने आ रही है। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे आवारा पशुओं की समस्या का समाधान करें, लेकिन वे इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जबकि शासन ने युद्ध स्तर पर निराश्रित गौवंश को गौ आश्रय स्थल में संरक्षित करने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत, विकास खंड कार्यालय एवं तहसील प्रशासन को सौंप रखी है। परंतु जिम्मेदार शासन के इस महत्वपूर्ण निर्देश की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं। पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन बहराइच और तहसील प्रशासन महसी से तत्काल हस्तक्षेप कर आवारा पशुओं की समस्या से निजात दिलाने की मांग की है, ताकि उनकी मेहनत और आजीविका को बचाया जा सके।
महसी में गौसंवर्धन योजनाएं ठंडे बस्ते में, फसलें बर्बाद: प्रशासन की अनदेखी से निराश्रित गौवंश उजाड़ रहे किसानों की फसलें – Mahsi News
बहराइच के विकास खंड महसी अंतर्गत सिकंदरपुर, जोतचांदपारा, महेशपुरवा, सिपहिया प्यूली और रेहुआ मंसूर सहित दर्जनों गांवों में आवारा पशुओं का आतंक लगातार बढ़ रहा है। किसान ओमकार नाथ अवस्थी, बिनीत रामसागर और आनंद कुमार ने बताया कि दर्जनों की संख्या में आवारा पशु खेतों में घुसकर गेहूं, सरसों, आलू और मटर जैसी हरी-भरी फसलों को नष्ट कर रहे हैं। फसलें बर्बाद होने से किसानों की आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ रहा है, जिससे उनमें भारी चिंता व्याप्त है। सिपहिया प्यूली और रेहुआ मंसूर के ग्रामीण किसानों ने बताया कि इस गंभीर समस्या को लेकर उन्होंने कई बार प्रशासन और सरकार से गुहार लगाई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। किसानों की मांग है कि आवारा पशुओं को जल्द से जल्द पकड़वाकर पशु आश्रय स्थलों में भेजा जाए या किसी सुरक्षित स्थान पर रखा जाए, ताकि उनकी फसलें सुरक्षित रह सकें। किसानों का आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी इस समस्या पर चुप्पी साधे हुए हैं, जिससे उनकी परेशानी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इस संबंध में ग्राम प्रधान, सचिव, लेखपाल और तहसील प्रशासन महसी की लापरवाही सामने आ रही है। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे आवारा पशुओं की समस्या का समाधान करें, लेकिन वे इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जबकि शासन ने युद्ध स्तर पर निराश्रित गौवंश को गौ आश्रय स्थल में संरक्षित करने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत, विकास खंड कार्यालय एवं तहसील प्रशासन को सौंप रखी है। परंतु जिम्मेदार शासन के इस महत्वपूर्ण निर्देश की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं। पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन बहराइच और तहसील प्रशासन महसी से तत्काल हस्तक्षेप कर आवारा पशुओं की समस्या से निजात दिलाने की मांग की है, ताकि उनकी मेहनत और आजीविका को बचाया जा सके।









































