बलरामपुर के रेहराबाजार विकास खंड स्थित विशुनपुर खरहना गांव के हनुमान पुरवा में सरयू नहर खंड-2 के अधिकारियों की लापरवाही से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। इटवा-रजवाहा नहर के माइनर में बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक पानी छोड़े जाने से सैकड़ों बीघा सरसों, गेहूं और मटर की फसलें जलमग्न हो गईं। किसानों को बड़े आर्थिक नुकसान की आशंका है।स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, मंगलवार देर रात माइनर में पानी का बहाव अचानक तेज हो गया। जब तक किसान स्थिति को समझ पाते, पानी खेतों में घुस गया और देखते ही देखते हनुमान पुरवा के आसपास का पूरा इलाका झील में तब्दील हो गया। किसानों का कहना है कि इस समय फसलों को इतने पानी की आवश्यकता नहीं थी, जिससे तैयार हो रही फसलें अब सड़ने की कगार पर हैं।फसलों की बर्बादी देखकर प्रभावित किसान हरिशंकर वर्मा, वीरेंद्र कुमार, प्रमोद कुमार, लल्लन वर्मा और रंगीलाल पाल ने कड़ा रोष व्यक्त किया। उन्होंने सिंचाई विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि एक तरफ खाद-बीज की बढ़ती कीमतें हैं, वहीं दूसरी तरफ विभाग की इस लापरवाही ने उनकी कमर तोड़ दी है।किसान राधेश्याम, राम तेज वर्मा, राम निहाल, विंदेश्वरी प्रसाद, दिनेश कुमार, उमेश कुमार, गणेश और प्रवेश सहित अन्य किसानों ने बताया कि जलभराव के कारण उनकी पूरी मेहनत बर्बाद हो गई है। उन्होंने इस स्थिति के लिए सिंचाई विभाग को जिम्मेदार ठहराया।पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारियों से तत्काल मौके का मुआयना कर नुकसान का आकलन कराने और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कोई समाधान नहीं निकाला गया, तो वे तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।
नहर में बिना सूचना छोड़ा पानी, सैकड़ों बीघा फसल डूबी:बलरामपुर में किसानों का फूटा गुस्सा
बलरामपुर के रेहराबाजार विकास खंड स्थित विशुनपुर खरहना गांव के हनुमान पुरवा में सरयू नहर खंड-2 के अधिकारियों की लापरवाही से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। इटवा-रजवाहा नहर के माइनर में बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक पानी छोड़े जाने से सैकड़ों बीघा सरसों, गेहूं और मटर की फसलें जलमग्न हो गईं। किसानों को बड़े आर्थिक नुकसान की आशंका है।स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, मंगलवार देर रात माइनर में पानी का बहाव अचानक तेज हो गया। जब तक किसान स्थिति को समझ पाते, पानी खेतों में घुस गया और देखते ही देखते हनुमान पुरवा के आसपास का पूरा इलाका झील में तब्दील हो गया। किसानों का कहना है कि इस समय फसलों को इतने पानी की आवश्यकता नहीं थी, जिससे तैयार हो रही फसलें अब सड़ने की कगार पर हैं।फसलों की बर्बादी देखकर प्रभावित किसान हरिशंकर वर्मा, वीरेंद्र कुमार, प्रमोद कुमार, लल्लन वर्मा और रंगीलाल पाल ने कड़ा रोष व्यक्त किया। उन्होंने सिंचाई विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि एक तरफ खाद-बीज की बढ़ती कीमतें हैं, वहीं दूसरी तरफ विभाग की इस लापरवाही ने उनकी कमर तोड़ दी है।किसान राधेश्याम, राम तेज वर्मा, राम निहाल, विंदेश्वरी प्रसाद, दिनेश कुमार, उमेश कुमार, गणेश और प्रवेश सहित अन्य किसानों ने बताया कि जलभराव के कारण उनकी पूरी मेहनत बर्बाद हो गई है। उन्होंने इस स्थिति के लिए सिंचाई विभाग को जिम्मेदार ठहराया।पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारियों से तत्काल मौके का मुआयना कर नुकसान का आकलन कराने और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कोई समाधान नहीं निकाला गया, तो वे तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।

























