
श्रावस्ती जिले की तराई में भी नाव हादसे का खतरा मंडरा रहा है। बहराइच के भरथापुर में हुए दर्दनाक नाव हादसे के बाद अब श्रावस्ती के जमुनहा विकासखंड स्थित ककरदरी गांव के 4000 से अधिक ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर राप्ती नदी पार करने को मजबूर हैं।यह गांव भारत-नेपाल सीमा पर स्थित है। केवल स्थानीय ग्रामीण ही नहीं, बल्कि सीमा पार नेपाल के एक दर्जन से अधिक गांवों के लगभग 30 हजार लोग भी खरीदारी के लिए नाव के सहारे ही जमुनहा बाजार पहुंचते हैं।ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से राप्ती नदी पर पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने आज तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है। उनकी यह मांग लगातार अनसुनी की जा रही है। ककरदरी निवासी जगतराम, रामसुरेश, कलेश कुमार, रामचंद्र और मोहित गुप्ता ने बताया, “हम लोग रोज़ नाव से नदी पार कर तीन किलोमीटर की दूरी तय कर जमुनहा बाजार पहुंचते हैं। सड़क मार्ग से जाने पर करीब 10-11 किलोमीटर घूमकर जाना पड़ता है, और जंगल व राप्ती बैराज के रास्ते सफर करना काफी मुश्किल होता है।”ग्रामीणों के अनुसार, दिनभर में लगभग 2000 से 3000 लोग नदी पार करते हैं। इनमें स्कूल जाने वाले बच्चे, महिलाएं और व्यापारी भी शामिल होते हैं। कई लोग अपनी बाइक और साइकिल तक नाव पर लादकर ले जाते हैं, जिससे खतरा और बढ़ जाता है।स्थानीय लोगों ने बताया कि नेपाल के पहाड़ों पर बारिश होने या बैराज से पानी छोड़े जाने पर राप्ती का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में नावें अनियंत्रित हो जाती हैं, जिससे दुर्घटना का जोखिम बढ़ जाता है। बहराइच के भरथापुर में हुए हालिया हादसे में भी यही स्थिति देखने को मिली थी, जहां अब तक एक महिला का शव बरामद हुआ है और आठ लोग लापता हैं।ककरदरी निवासी रामलाल ने चेतावनी दी, “अगर समय रहते पुल का निर्माण नहीं हुआ तो यहां भी कभी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। हमने कई बार अधिकारियों और नेताओं से मांग की, लेकिन हमें सिर्फ आश्वासन ही मिला है।”स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द राप्ती नदी पर एक स्थायी पुल के निर्माण की मांग की है, ताकि दोनों देशों के हजारों ग्रामीणों की आवाजाही सुरक्षित हो सके और भविष्य में किसी बड़े हादसे को टाला जा सके।












































