घोसियारी बाजार स्थित दुर्गा मंदिर प्रांगण में मंगलवार को श्रीराम कथा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान आचार्य धनंजय महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि राम कथा सुनने मात्र से ही मनुष्य के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आचार्य धनंजय ने राम नाम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह सबसे बड़ा मंत्र है। उन्होंने बताया कि भगवान शिव भी राम नाम का जाप करते हैं। राम नाम में शिव, सूर्य, चंद्रमा, अग्नि और वायु सहित सभी शक्तियां समाहित हैं। उन्होंने आगे कहा कि यही कारण है कि जीवन के हर शुभ अवसर पर राम नाम का स्मरण किया जाता है। बच्चे के जन्म से लेकर विवाह जैसे मांगलिक कार्यों तक श्रीराम के गीत गाए जाते हैं, और अंतिम यात्रा में भी राम नाम का ही घोष किया जाता है। आचार्य धनंजय ने कलियुग में हनुमान जी की महिमा का भी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि हनुमान जी भक्तों की पुकार पर तुरंत सहायता करते हैं और उन्होंने कभी अपने पराक्रम का श्रेय स्वयं नहीं लिया, बल्कि प्रभु श्रीराम की भक्ति को सर्वोपरि माना। उन्होंने यह भी कहा कि जहां भगवान श्रीराम की कृपा होती है, वहीं राम कथा संभव हो पाती है। जहां भक्त निवास करते हैं, वहां राम की विशेष कृपा बनी रहती है। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालु राम नाम के जयकारों से भाव-विभोर हो गए। इस आयोजन से क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय हो गया और लोगों में आध्यात्मिक चेतना का संचार हुआ।
राम कथा सुनने से दूर होते हैं कष्ट:घोसियारी में आयोजित श्रीराम कथा में श्रद्धालुओं की भीड़
घोसियारी बाजार स्थित दुर्गा मंदिर प्रांगण में मंगलवार को श्रीराम कथा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान आचार्य धनंजय महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि राम कथा सुनने मात्र से ही मनुष्य के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आचार्य धनंजय ने राम नाम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह सबसे बड़ा मंत्र है। उन्होंने बताया कि भगवान शिव भी राम नाम का जाप करते हैं। राम नाम में शिव, सूर्य, चंद्रमा, अग्नि और वायु सहित सभी शक्तियां समाहित हैं। उन्होंने आगे कहा कि यही कारण है कि जीवन के हर शुभ अवसर पर राम नाम का स्मरण किया जाता है। बच्चे के जन्म से लेकर विवाह जैसे मांगलिक कार्यों तक श्रीराम के गीत गाए जाते हैं, और अंतिम यात्रा में भी राम नाम का ही घोष किया जाता है। आचार्य धनंजय ने कलियुग में हनुमान जी की महिमा का भी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि हनुमान जी भक्तों की पुकार पर तुरंत सहायता करते हैं और उन्होंने कभी अपने पराक्रम का श्रेय स्वयं नहीं लिया, बल्कि प्रभु श्रीराम की भक्ति को सर्वोपरि माना। उन्होंने यह भी कहा कि जहां भगवान श्रीराम की कृपा होती है, वहीं राम कथा संभव हो पाती है। जहां भक्त निवास करते हैं, वहां राम की विशेष कृपा बनी रहती है। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालु राम नाम के जयकारों से भाव-विभोर हो गए। इस आयोजन से क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय हो गया और लोगों में आध्यात्मिक चेतना का संचार हुआ।









































