भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को और अधिक सशक्त, अनुशासित एवं कार्यकर्ता-केन्द्रित बनाने के उद्देश्य से ‘SIR’ कार्यशाला (द्वितीय चरण) का आयोजन किया। यह कार्यशाला 8 जनवरी 2026, गुरुवार को इटवा विधानसभा क्षेत्र के भाजपा बिस्कोहर, इटवा और खुनियांव मंडलों में आयोजित की गई। कार्यक्रम का नेतृत्व उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री और निवर्तमान विधायक डॉ. सतीश द्विवेदी ने किया। कार्यशाला में संगठन की सूची में नाम जोड़ने के विषय पर विस्तृत चर्चा की गई। पूर्व मंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी ने इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि यह कार्य पूरी तरह योजनाबद्ध, पारदर्शी और संगठनात्मक मर्यादा के अनुरूप होना चाहिए। डॉ. द्विवेदी ने जोर दिया कि प्रारंभिक सूची जारी होने के बाद यदि किसी योग्य, सक्रिय या वास्तविक आम नागरिक का नाम किसी कारणवश छूट गया हो, तो उसे ‘SIR’ के निर्धारित मानकों के अनुसार ही जोड़ा जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना सत्यापन, किसी दबाव या अनुशंसा के आधार पर नाम जोड़ने से संगठन की व्यवस्था और विश्वसनीयता कमजोर होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नाम बढ़ाने से पहले स्थल सत्यापन, स्थानीय पदाधिकारियों की पुष्टि और प्रामाणिक तथ्यों का होना अनिवार्य है। बूथ, शक्ति केंद्र और मंडल स्तर के पदाधिकारियों को इस कार्य में अपनी जिम्मेदारी का ईमानदारी से निर्वहन करना चाहिए। पूर्व मंत्री ने इस बात पर भी बल दिया कि “लिस्ट केवल संख्या बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि संगठन की वास्तविक ताकत का दर्पण होती है। इसलिए नाम जोड़ते समय यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति संगठन से सक्रिय रूप से जुड़ा हो, पार्टी की विचारधारा के प्रति समर्पित हो और जनता के बीच उसकी सकारात्मक भूमिका रही हो। डॉ. द्विवेदी ने यह भी कहा कि सूची में संशोधन की प्रक्रिया समयबद्ध होनी चाहिए, ताकि अंतिम सूची तैयार होने से पूर्व सभी आवश्यक सुधार किए जा सकें। अनावश्यक विलंब या मनमानी संगठनात्मक अनुशासन के विपरीत है। अपने संबोधन के अंत में, उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे सूची से जुड़े प्रत्येक कार्य को जिम्मेदारी, ईमानदारी और संगठन हित को सर्वोपरि रखते हुए करें। इससे संगठन मजबूत होगा और जनता का विश्वास भी सुदृढ़ होगा।
भाजपा कार्यशाला 'SIR' का दूसरा चरण:इटवा में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व मंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी ने दिए दिशा-निर्देश
भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को और अधिक सशक्त, अनुशासित एवं कार्यकर्ता-केन्द्रित बनाने के उद्देश्य से ‘SIR’ कार्यशाला (द्वितीय चरण) का आयोजन किया। यह कार्यशाला 8 जनवरी 2026, गुरुवार को इटवा विधानसभा क्षेत्र के भाजपा बिस्कोहर, इटवा और खुनियांव मंडलों में आयोजित की गई। कार्यक्रम का नेतृत्व उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री और निवर्तमान विधायक डॉ. सतीश द्विवेदी ने किया। कार्यशाला में संगठन की सूची में नाम जोड़ने के विषय पर विस्तृत चर्चा की गई। पूर्व मंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी ने इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि यह कार्य पूरी तरह योजनाबद्ध, पारदर्शी और संगठनात्मक मर्यादा के अनुरूप होना चाहिए। डॉ. द्विवेदी ने जोर दिया कि प्रारंभिक सूची जारी होने के बाद यदि किसी योग्य, सक्रिय या वास्तविक आम नागरिक का नाम किसी कारणवश छूट गया हो, तो उसे ‘SIR’ के निर्धारित मानकों के अनुसार ही जोड़ा जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना सत्यापन, किसी दबाव या अनुशंसा के आधार पर नाम जोड़ने से संगठन की व्यवस्था और विश्वसनीयता कमजोर होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नाम बढ़ाने से पहले स्थल सत्यापन, स्थानीय पदाधिकारियों की पुष्टि और प्रामाणिक तथ्यों का होना अनिवार्य है। बूथ, शक्ति केंद्र और मंडल स्तर के पदाधिकारियों को इस कार्य में अपनी जिम्मेदारी का ईमानदारी से निर्वहन करना चाहिए। पूर्व मंत्री ने इस बात पर भी बल दिया कि “लिस्ट केवल संख्या बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि संगठन की वास्तविक ताकत का दर्पण होती है। इसलिए नाम जोड़ते समय यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति संगठन से सक्रिय रूप से जुड़ा हो, पार्टी की विचारधारा के प्रति समर्पित हो और जनता के बीच उसकी सकारात्मक भूमिका रही हो। डॉ. द्विवेदी ने यह भी कहा कि सूची में संशोधन की प्रक्रिया समयबद्ध होनी चाहिए, ताकि अंतिम सूची तैयार होने से पूर्व सभी आवश्यक सुधार किए जा सकें। अनावश्यक विलंब या मनमानी संगठनात्मक अनुशासन के विपरीत है। अपने संबोधन के अंत में, उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे सूची से जुड़े प्रत्येक कार्य को जिम्मेदारी, ईमानदारी और संगठन हित को सर्वोपरि रखते हुए करें। इससे संगठन मजबूत होगा और जनता का विश्वास भी सुदृढ़ होगा।





































