श्रावस्ती जनपद में कड़ाके की ठंड के बीच समाजसेवी नफीस सिद्दीकी ने एक बेसहारा मवेशी की जान बचाकर मानवता का उदाहरण पेश किया है। उन्होंने सड़क किनारे ठिठुर रहे एक पशु के लिए अलाव, भोजन और पानी की व्यवस्था की, जिससे उसे राहत मिली। इन दिनों श्रावस्ती में कड़ाके की ठंड और शीतलहर का प्रकोप जारी है। इसका असर आम जनजीवन के साथ-साथ सड़कों पर भटकने वाले बेसहारा पशुओं पर भी पड़ रहा है। ठंड से बचाव के लिए इन पशुओं के पास न तो कोई ठिकाना होता है और न ही भोजन की व्यवस्था, जिससे उनकी जान को खतरा बना रहता है। ऐसी ही एक घटना श्रावस्ती में सामने आई, जहां एक मवेशी सड़क किनारे ठंड से बुरी तरह कांप रहा था। वह कई दिनों से भूखा और असहाय था, जिसके कारण वह चल भी नहीं पा रहा था और न ही खुद को ठंड से बचा पा रहा था। इसी दौरान वहां से गुजर रहे श्रावस्ती के समाजसेवी नफीस सिद्दीकी की नजर उस मवेशी पर पड़ी। उन्होंने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तत्काल मवेशी के लिए अलाव की व्यवस्था करवाई। अलाव के साथ-साथ सिद्दीकी ने पशु के लिए खाने-पानी का भी इंतजाम किया। कुछ समय बाद मवेशी को ठंड से राहत मिली, जिससे मौके पर मौजूद लोगों ने भी संतोष व्यक्त किया। इस अवसर पर समाजसेवी नफीस सिद्दीकी ने कहा, “इस कड़ाके की ठंड में केवल इंसान ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षी भी हमारी मदद के मोहताज हैं। सड़क पर घूमने वाले बेसहारा पशुओं को रहने का कोई सुरक्षित स्थान नहीं मिलता, जिससे वे ठंड में सबसे ज्यादा परेशान होते हैं। ऐसे में हम सभी का कर्तव्य है कि पशुओं के प्रति दयालु बनें।” उन्होंने आमजन से अपील की कि यदि कहीं भी कोई पशु ठंड से परेशान दिखाई दे, तो लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार अलाव, बोरा, भूसा या खाने-पानी की व्यवस्था अवश्य करें। उन्होंने जोर दिया कि छोटी-सी मदद भी किसी बेजुबान की जान बचा सकती है। सिद्दीकी का यह कार्य समाज के लिए एक प्रेरणा है।









































