सोहनी बलईगांव में वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से आयोजित एक माह की हस्तशिल्प थारु क्राफ्ट प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। इस कार्यशाला का उद्देश्य पारंपरिक थारू हस्तशिल्प को आधुनिक डिजाइन, गुणवत्ता और बाजार से जोड़कर स्थानीय महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि शैलेन्द्र (राजस्थान) उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में एक अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। इस अवसर पर प्रशिक्षण डिजाइनर संजय जी, ट्रेनर राजकुमारी जी और बड़ी संख्या में थारु समुदाय की महिलाएं भी उपस्थित थीं। मुख्य अतिथि शैलेंद्र ने अपने संबोधन में कहा कि भारत सरकार हस्तशिल्प से जुड़े कारीगरों, विशेषकर महिलाओं को कौशल विकास के माध्यम से सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यशाला स्थानीय प्रतिभा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। विशिष्ट अतिथि ने इस बात पर जोर दिया कि थारु क्राफ्ट हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। इसे संरक्षित करने के साथ-साथ आजीविका के सशक्त साधन के रूप में विकसित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को डिज़ाइन, फिनिशिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और विपणन की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण डिजाइनर संजय जी ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि एक माह के दौरान प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ नवाचार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ट्रेनर राजकुमारी जी ने प्रतिभागी महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें निरंतर अभ्यास और रचनात्मकता पर जोर देने की सलाह दी।
सोहनी बलईगांव में थारु हस्तशिल्प प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू: वस्त्र मंत्रालय की पहल पर एक माह का कार्यक्रम – Mihinpurwa(Bahraich) News
सोहनी बलईगांव में वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से आयोजित एक माह की हस्तशिल्प थारु क्राफ्ट प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। इस कार्यशाला का उद्देश्य पारंपरिक थारू हस्तशिल्प को आधुनिक डिजाइन, गुणवत्ता और बाजार से जोड़कर स्थानीय महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि शैलेन्द्र (राजस्थान) उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में एक अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। इस अवसर पर प्रशिक्षण डिजाइनर संजय जी, ट्रेनर राजकुमारी जी और बड़ी संख्या में थारु समुदाय की महिलाएं भी उपस्थित थीं। मुख्य अतिथि शैलेंद्र ने अपने संबोधन में कहा कि भारत सरकार हस्तशिल्प से जुड़े कारीगरों, विशेषकर महिलाओं को कौशल विकास के माध्यम से सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यशाला स्थानीय प्रतिभा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। विशिष्ट अतिथि ने इस बात पर जोर दिया कि थारु क्राफ्ट हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। इसे संरक्षित करने के साथ-साथ आजीविका के सशक्त साधन के रूप में विकसित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को डिज़ाइन, फिनिशिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और विपणन की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण डिजाइनर संजय जी ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि एक माह के दौरान प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ नवाचार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ट्रेनर राजकुमारी जी ने प्रतिभागी महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें निरंतर अभ्यास और रचनात्मकता पर जोर देने की सलाह दी।









































