बहराइच में ईंट-भट्ठों पर कार्यरत प्रवासी श्रमिक परिवारों के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग एक विशेष टीकाकरण अभियान शुरू कर रहा है। यह अभियान तीन चरणों में चलाया जाएगा, जिसमें 0 से 5 साल तक के लगभग 2500 बच्चों और गर्भवती महिलाओं को लक्षित किया गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. संजय शर्मा ने बताया कि प्रवासी श्रमिक परिवारों की लगातार आवाजाही के कारण उनके बच्चे नियमित टीकाकरण सेवाओं से वंचित रह जाते हैं। इसका सीधा असर बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षित मातृत्व पर पड़ता है। इसी चुनौती का सामना करने के लिए जनपद के 318 ईंट-भट्ठों की पहचान की गई है और यह विशेष कार्यक्रम तैयार किया गया है। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एस.के. सिंह के अनुसार, यह अभियान तीन चरणों में संचालित होगा। पहला चरण 15, 16, 19 और 20 जनवरी को, दूसरा चरण 16, 17, 19 और 20 फरवरी को, जबकि तीसरा चरण 23, 24, 27 और 30 मार्च को आयोजित किया जाएगा। इन निर्धारित तिथियों पर स्वास्थ्य टीमें सीधे ईंट-भट्ठों पर पहुँचकर बच्चों को आवश्यक टीके लगाएंगी। साथ ही, गर्भवती महिलाओं की एएनसी (एंटीनेटल केयर) जांच, टीकाकरण और स्वास्थ्य परामर्श भी प्रदान किया जाएगा। अभिभावकों को टीकाकरण के महत्व और अगले टीके की समय-सीमा के बारे में भी जागरूक किया जाएगा। इस अभियान में आशा, एएनएम और स्थानीय स्वास्थ्यकर्मी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के एसएमओ डॉ. विपिन लिखोरे ने बताया कि टीकाकरण जन्म से पाँच वर्ष तक के बच्चों को टीबी, पोलियो, हेपेटाइटिस बी, डिप्थीरिया, टिटनेस, मीजल्स, परट्यूटिस (काली खांसी), रूबेला, निमोनिया, वायरल डायरिया, जेई, हेपेटाइटिस टाइप बी और रोटावायरस जैसी गंभीर बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करता है। गर्भवती महिलाओं को भी टीडी (टिटनेस-डिप्थीरिया) के दो टीके लगाए जाते हैं।
ईंट-भट्ठों पर विशेष टीकाकरण अभियान: 2500 से अधिक बच्चों, गर्भवती महिलाओं को मिलेगा सुरक्षा कवच – Bahraich News
बहराइच में ईंट-भट्ठों पर कार्यरत प्रवासी श्रमिक परिवारों के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग एक विशेष टीकाकरण अभियान शुरू कर रहा है। यह अभियान तीन चरणों में चलाया जाएगा, जिसमें 0 से 5 साल तक के लगभग 2500 बच्चों और गर्भवती महिलाओं को लक्षित किया गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. संजय शर्मा ने बताया कि प्रवासी श्रमिक परिवारों की लगातार आवाजाही के कारण उनके बच्चे नियमित टीकाकरण सेवाओं से वंचित रह जाते हैं। इसका सीधा असर बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षित मातृत्व पर पड़ता है। इसी चुनौती का सामना करने के लिए जनपद के 318 ईंट-भट्ठों की पहचान की गई है और यह विशेष कार्यक्रम तैयार किया गया है। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एस.के. सिंह के अनुसार, यह अभियान तीन चरणों में संचालित होगा। पहला चरण 15, 16, 19 और 20 जनवरी को, दूसरा चरण 16, 17, 19 और 20 फरवरी को, जबकि तीसरा चरण 23, 24, 27 और 30 मार्च को आयोजित किया जाएगा। इन निर्धारित तिथियों पर स्वास्थ्य टीमें सीधे ईंट-भट्ठों पर पहुँचकर बच्चों को आवश्यक टीके लगाएंगी। साथ ही, गर्भवती महिलाओं की एएनसी (एंटीनेटल केयर) जांच, टीकाकरण और स्वास्थ्य परामर्श भी प्रदान किया जाएगा। अभिभावकों को टीकाकरण के महत्व और अगले टीके की समय-सीमा के बारे में भी जागरूक किया जाएगा। इस अभियान में आशा, एएनएम और स्थानीय स्वास्थ्यकर्मी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के एसएमओ डॉ. विपिन लिखोरे ने बताया कि टीकाकरण जन्म से पाँच वर्ष तक के बच्चों को टीबी, पोलियो, हेपेटाइटिस बी, डिप्थीरिया, टिटनेस, मीजल्स, परट्यूटिस (काली खांसी), रूबेला, निमोनिया, वायरल डायरिया, जेई, हेपेटाइटिस टाइप बी और रोटावायरस जैसी गंभीर बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करता है। गर्भवती महिलाओं को भी टीडी (टिटनेस-डिप्थीरिया) के दो टीके लगाए जाते हैं।









































