बस्ती जिले के चौकड़ी टोल प्लाजा पर टोल कर्मचारियों ने पेटी ठेकेदारों के अधीन काम करने से इनकार कर दिया है। कर्मचारियों ने छोटे वेंडरों के विरोध में फॉर्म भरने से भी मना कर दिया है। यह विरोध आईआरबी कंपनी को लखनऊ से गोरखपुर तक छह टोल प्लाजा पर पथकर वसूली और हाईवे के रखरखाव के लिए मिले 9270 करोड़ रुपये के टेंडर के बाद सामने आया है। सरकार ने लखनऊ-गोरखपुर फोर लेन का जिम्मा 20 साल के लिए आईआरबी को सौंपा है। टोल कर्मचारियों, जिनमें जयश्री, राजकुमार, चन्द्रभान, अरविंद पाण्डेय, उमाशंकर, पंकज तिवारी और अनितराम शामिल हैं, का कहना है कि जब मुख्य ठेका आईआरबी को मिला है, तो वे पेटी ठेकेदारों के तहत काम नहीं करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि छोटी कंपनियां उनके अधिकारों का हनन करेंगी, ओवरटाइम कराएंगी और कम वेतन देंगी, जिससे उनका शोषण होगा। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे बस्ती जिलाधिकारी और श्रम विभाग अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले से अवगत कराएंगे। इस संबंध में टोल मैनेजर राकेश यादव ने बताया कि उनका वर्तमान प्रोजेक्ट समाप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि आईआरबी को सरकार ने 20 वर्ष के लिए कार्यभार सौंपा है, जिसमें कुछ पेटी कांट्रेक्टर अनैतिक तरीके से हावी होने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह सरकार की मर्जी पर निर्भर करता है।









































